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रायगढ़ में फर्जी अंकसूची से डाकपाल की नौकरी:मामले का फरार मास्टर माइंड कोरबा से गिरफ्तार, दो आरोपी पहले पकड़े जा चुके
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी अंकसूची उपलब्ध कराकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले मुख्य आरोपी को पुलिस ने कोरबा से गिरफ्तार किया है। पिछले लंबे समय से ठगी का मास्टर माइंड फरार था। इससे पहले पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को पहले जेल भेजा जा चुका है। मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है। मिली जानकारी के मुताबिक जुलाई 2023 में भारतीय डाक विभाग द्वारा ग्रामीण डाक सेवकों की ऑनलाइन भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ की गई थी। भर्ती के दौरान जिला सक्ती निवासी नरेन्द्र कुमार और जिला जांजगीर-चांपा निवासी सोनम साहू ने ऑनलाइन आवेदन करते समय कक्षा 10वीं की अंकसूची प्रस्तुत की थी। प्रस्तुत अंकों के आधार पर दोनों का चयन रायगढ़ डाक संभाग अंतर्गत बर्रा और सुलेसा शाखा में डाकपाल पद पर हुआ था। नियुक्ति से पूर्व दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान संबंधित अंकसूचियों का सत्यापन तमिलनाडु बोर्ड से कराया गया, जहां से प्राप्त रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि दोनों अंकसूचियां फर्जी हैं और बोर्ड द्वारा कभी जारी ही नहीं की गई थी। इसके बाद डाकघर अधीक्षक डाकघर की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने अपराध कायम कर विवेचना शुरू की। जहां पुलिस ने फरवरी 2026 में दोनों अभ्यर्थियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में उन्होंने खुलासा किया कि नौकरी की तलाश के दौरान उनकी पहचान कोरबा निवासी विनोद कुमार राठौर 47 साल से हुई थी।
नौकरी लगाने 3.50 लाख की डिमांड
विनोद राठौर ने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर तीन से साढ़े तीन लाख रुपये की मांग की। तब नरेन्द्र कुमार ने आरोपी को 3.50 लाख दिए, जबकि सोनम साहू ने नियुक्ति के बाद भुगतान करने की सहमति दी थी। ऐसे में विनोद कुमार ने दोनों को फर्जी अंकसूचियां उपलब्ध कराई। जिन्हें जानते हुए भी उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में उपयोग किया।
दो आरोपियों को पहले जेल भेजा गया
दस्तावेज सत्यापन में फर्जीवाड़ा उजागर होने पर दोनों की नियुक्ति निरस्त कर दी गई। पुलिस ने दोनों आरोपियों से फर्जी अंकसूचियां व उनके वास्तविक शैक्षणिक दस्तावेज जब्त कर उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा था। वहीं प्रकरण का मुख्य साजिशकर्ता विनोद कुमार राठौर घटना के बाद से फरार था।
नकली नोट प्रकरण में भी जेल जा चुका
उसकी तलाश के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि वर्ष 2013 में नकली नोट प्रकरण में उसे 10 साल की सजा हुई थी। जेल से बाहर आने के बाद आरोपी फिर से धोखाधड़ी के माध्यम से लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी करने में सक्रिय हो गया था। रायगढ़ में उसके साथियों के खिलाफ अपराध दर्ज होने के बाद वह लगातार स्थान बदलकर पुलिस से बचने का प्रयास कर रहा था।
आरोपी को पुलिस ने कोरबा से गिरफ्तार किया
तभी पुलिस को सूचना मिली कि फरार आरोपी कोरबा में छिपा हुआ है। सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस की टीम तत्काल कोरबा रवाना हुई और विनोद कुमार राठौर कोरबा से हिरासत में लेकर रायगढ़ लाई। पूछताछ में आरोपी ने फर्जी अंकसूचियां उपलब्ध कराकर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी करना स्वीकार किया। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
षड्यंत्र रचने वाले गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई जारी
SSP शशि मोहन सिंह ने बताया कि ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत लंबे समय से फरार आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से सरकारी नौकरियों में प्रवेश का प्रयास करने वाले और ऐसे षड्यंत्र रचने वाले गिरोहों के खिलाफ पुलिस कड़ी कार्रवाई कर रही है। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को कानून से बचने नहीं दिया जाएगा।