समाचार · दिल्ली
मुंबई की हवा दिल्ली से भी ज्यादा प्रदूषित, हाई कोर्ट ने कहा- अधिकारी चैन से कैसे सो रहे हैं?

बुधवार को शोर और वायु प्रदूषण से जुड़ी स्वतः संज्ञान वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस गिरिश एस. कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की पीठ ने कहा कि हालात आपात स्थिति जैसे हैं. अदालत ने चेतावनी दी कि आदेशों का पालन कराने में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जा सकता है.
पटाखे फोड़ने पर रोक के आदेश का उल्लंघन
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक हाई कोर्ट ने कहा कि पुलिस की ओर से उसके आदेशों को लागू करने में काफी सुस्ती दिखाई दे रही है. अदालत ने जुलूसों में इस्तेमाल होने वाले साउंड सिस्टम के लाइसेंस प्रदर्शित करने और त्योहारों के दौरान सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर रोक लगाने संबंधी निर्देशों का उल्लेख किया.
कोर्ट ने मंगलवार को दक्षिण मुंबई में क्रॉफर्ड मार्केट के पास एक पुलिस स्टेशन के सामने व्यस्त सड़क पर पटाखे फोड़े जाने की घटना का भी जिक्र किया. अदालत ने इसे अपने आदेशों का खुलेआम उल्लंघन बताया.
पीठ ने कहा कि अधिकारियों की निष्क्रियता नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़े संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन हो सकती है. ऐसे मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जुर्माना लगाने और अभियोजन की कार्रवाई भी की जा सकती है.
मुंबई पुलिस कमिश्नर को बैठक बुलाने का निर्देश
हाई कोर्ट ने मुंबई पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया कि वह सभी पुलिस थानों के प्रभारियों के साथ बैठक करें. इसका उद्देश्य अदालत के आदेशों को सख्ती से लागू कराना है.
अदालत ने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) के आयुक्तों को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है. अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी.
समुद्री हवा और खुले स्थानों के बावजूद प्रदूषण क्यों?
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मुंबई में समुद्र से हवा आती है और यहां खुले स्थान भी हैं. इसके बावजूद प्रदूषण की स्थिति इतनी खराब होना चिंता की बात है. न्यायाधीश ने अधिकारियों से कहा कि उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मुंबई का आसमान साफ रहे.
न्यायाधीश ने कहा कि लोग प्रदूषण के कारण परेशान हैं और घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं. सुबह की सैर करना भी मुश्किल हो गया है. उन्होंने शहर में छाई धुंध पर चिंता जताते हुए कहा कि यह समझना मुश्किल है कि हालात किस दिशा में जा रहे हैं.
अदालत ने कहा कि मुंबई में प्रदूषण का स्तर दिल्ली से भी आगे निकलने की स्थिति गंभीर है. अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे इस आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रभावी कदम उठाएं.
ये भी पढ़ें: Delhi AQI: दिल्ली में फिर बिगड़ी हवा, ITO में 280 और AIIMS में 276 पहुंचा AQI
विजिबिलिटी 500 मीटर से भी कम, पटाखों से बढ़ेगा प्रदूषण
हाई कोर्ट ने मंगलवार को विजिबिलिटी 500 मीटर से नीचे चले जाने पर भी चिंता जताई. अदालत ने सवाल किया कि ऐसी स्थिति में भी प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है.
जस्टिस कुलकर्णी ने कहा कि पटाखे फोड़ने से 15-20 मिनट का आनंद मिल सकता है, लेकिन इससे हवा में जहरीले प्रदूषक बढ़ जाते हैं. ये प्रदूषक शरीर के अलग-अलग हिस्सों में जमा हो सकते हैं और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
उन्होंने कहा कि प्रदूषण से निपटने के लिए केवल प्रकृति पर निर्भर नहीं रहा जा सकता. लोगों की आदतों में बदलाव लाना भी जरूरी है. मुंबई के लोगों को ऐसी स्थिति में नहीं पहुंचना चाहिए कि उन्हें घर से बाहर निकलने से पहले AQI देखना पड़े.