Saturday, 1 August 2026
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प्रतिकूलता में भी प्रतिशोध का भाव न रखें: मुनि निरापद सागर

INT News1 August 2026 at 05:58 am

भास्कर संवाददाता | शाढ़ौरा स्थानीय पार्श्वनाथ धाम में संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य मुनि श्री निरापद सागर जी महाराज का ससंघ वर्ष 2026 का वर्षायोग चातुर्मास कलश स्थापना समारोह गुरुवार को अपार भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। वर्तमान आचार्य श्री समय सागर जी महाराज एवं तीर्थ उद्धारक जगत पूज्य निर्यापक मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से आयोजित इस चार माह के वर्षाकाल प्रवास में मुनि श्री के साथ एलक श्री सुमंगल सागर महाराज तथा क्षुल्लक श्री शुभम सागर महाराज भी विराजित हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण, आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर अकलंक पाठशाला के नन्हे बच्चों द्वारा प्रस्तुत की गईं शिक्षाप्रद लघु नाटिकाओं ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। चातुर्मास का मुख्य सर्वार्थ सिद्धि अमृत कलश स्थापित करने का परम सौभाग्य नगर के श्रेष्ठी श्रेयांस कुमार अक्षय कुमार जैन (पहाड़ा) परिवार को प्राप्त हुआ। अनुकूलता-प्रतिकूलता कर्मों का फल: मुनि श्री समारोह को संबोधित करते हुए पूज्य मुनि श्री निरापद सागर जी महाराज ने कहा कि संसार में आने वाली अनुकूलताएं और प्रतिकूलताएं हमारे कर्म के उदय का परिणाम होती हैं। उन्होंने जीवन का गूढ़ दर्शन समझाते हुए कहा कि जिस प्रकार एक वृक्ष काटने वाले से भी प्रतिशोध की भावना नहीं रखता, ठीक उसी प्रकार जिन शासन का अनुयायी भी अपनी संस्कृति को मिटाने वालों के प्रति वैर या प्रतिशोध का भाव नहीं रखता। वह केवल यही भावना भाता है कि हमारी संस्कृति पले-बढ़े, और इसी कारण जैन संस्कृति आज तक जयवंत है। मुनि श्री ने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जिस प्रकार हमें अपने पिता, पुत्र और पत्नी पर गर्व होता है, उसी प्रकार हमें अपने धर्म पर भी अटूट गौरव होना चाहिए।