समाचार · मध्य प्रदेश
आश्रम ही नहीं सरकारी जमीन पर अवैध-साम्राज्य बना रखा है:सुलभ कॉम्प्लेक्स तोड़ बनाया वृद्धाश्रम अस्पताल परिसर में गोशाला भी बनाई
महाराणा प्रताप नगर में पानी की टंकी के नीचे चल रहे प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम को सुलभ कॉम्प्लेक्स तोड़कर बनाया गया था। इसके अलावा पास में बने सरकारी स्कूल में भी अवैध रूप से गोशाला संचालित करने की बात सामने आई है। इधर, बुजुर्ग महिला से मारपीट के मामले के बाद प्रशासन ने वृद्धाश्रम सील कर दिया। इसे अवैध रूप से संचालित करने और आश्रम में मिली अनियमितताओं के बाद संचालिका नीलम दुबे पर भी एफआईआर की कार्रवाई चल रही है। लोगों ने बताया कि टंकी परिसर में पहले सुलभ कॉम्प्लेक्स बना हुआ था। इसे तत्कालीन पार्षद व एमआईसी सदस्य संतोष गौर ने तुड़वाकर मेन रोड की तरफ बनवाया। फिर टंकी परिसर का विस्तार कर बगीचा तैयार किया। वृद्धाश्रम बनाया और इसके आगे की ओर एक सामुदायिक भवन भी तैयार करवा दिया। संतोष गौर ने इसे संचालित करने का जिम्मा नीलम दुबे को दिया था। रहवासियों ने आरोप लगाया कि नीलम वृद्धाश्रम के नाम पर चंदा वसूलती हैं। नीलम ने सरकारी अस्पताल में भी कब्जा जमा रखा है। सरकारी क्वार्टर पर भी कब्जा
नीलम, पास बने सरकारी अस्पताल परिसर में गोशाला संचालित करती हैं। साथ ही उन्होंने अस्पताल के वैक्सीन वार्ड पर भी कब्जा कर रखा है। वे अस्पताल के क्वार्टर में अवैध रूप से अपने परिवार के साथ रहती हैं। बताया जा रहा है कि नीलम पापड़ का कारखाना भी चलाती हैं। आंगनवाड़ी के लिए मांगी थी जमीन, विभाग ने नहीं दी वृद्धाश्रम की जमीन पर आंगनवाड़ी खोलने की तैयारी थी। सरकारी जमीन होने के कारण महिला बाल विकास ने नगर निगम को आंगनवाड़ी खोलने के लिए पत्राचार किया था। लेकिन निगम ने महिला बाल विकास को आंगनवाड़ी खोलने के लिए जमीन नहीं दी। अस्पताल के पास लगी सरकारी जमीन पर नगर निगम ने ही खेल परिसर का निर्माण किया है। रहवासियों का आरोप है कि संतोष गौर का बेटा ऋषभ ही इसका संचालन देखता है। मालूम हो कि वर्ष 2021-22 में निगमायुक्त प्रतिभा पाल थीं। जोन क्रमांक चार के प्रभारी विवेश जैन थे। निगम के इस कार्यकाल में संतोष गौर एमआईसी सदस्य थे। अवैध वृद्धाश्रम में बुजुर्गों की दुर्दशा पर हाई कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान, पूछा-प्रशासन क्या कदम उठा रहा है? महाराणा प्रताप नगर में पानी की टंकी परिसर में चार साल से संचालित हो रहे अवैध वृद्धाश्रम, बुजुर्गों की दुर्दशा, नाबालिग द्वारा वृद्धों की पिटाई के मामले में हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। शुक्रवार को प्रशासनिक जज सुबोध अभ्यंकर, जस्टिस आलोक अवस्थी की डिविजन बेंच ने मामलों की सुनवाई शुरू करने से पहले अतिरिक्त महाधिवक्ता को इस मामले में निर्देश दिए। कोर्ट ने प्रशासन, पुलिस और नगर निगम से पूछा कि इस मामले में क्या कदम उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों को हाई कोर्ट के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। वृद्ध महिला की पिटाई का वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन, निगम ने आश्रम को सील कर दिया है। वृद्धजन को अन्य आश्रमों में शिफ्ट कर दिया है। युगपुरुष धाम पर भी लिया था संज्ञान
इसके पहले युगपुरुष धाम में 17 दिव्यांग बच्चों की मौत के मामले में हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान ले रखा है। हाई कोर्ट ने मामले में न्याय मित्र भी नियुक्त कर रखा है। न्याय मित्र ने रिपोर्ट में कहा कि बच्चों को उज्जैन के सेवाधाम में शिफ्ट किया गया था। वहां भी अच्छी सुविधाएं नहीं हैं। बीमार होने पर दवाइयों तक का संकट रहता है।