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विक्रमशिला सेतु पर 200 टन के गर्डर की लांचिंग शुरू, मकर संक्रांति तक चमचमाएगा नया पुल

Vikramshila Setu Bhagalpur Restoration: भागलपुर और पूरे अंग क्षेत्र की जीवनरेखा कहे जाने वाले विक्रमशिला सेतु से आवाजाही करने वाले लाखों यात्रियों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है. अगर आप भी इस पुल पर रोजाना लगने वाले भीषण जाम और हिचकोलों से परेशान रहते हैं, तो अब आपकी यह परेशानी बहुत जल्द दूर होने वाली है.
विक्रमशिला सेतु के जर्जर और क्षतिग्रस्त हिस्से को बदलकर उसे नया जीवन देने का अभियान अब एक नए और बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच चुका है. पुल निर्माण निगम की सख्त देखरेख में अलग-अलग तकनीकी टीमों को जिम्मेदारी सौंपकर काम को युद्ध स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है.
200 टन का स्टील गर्डर बना उम्मीद की नई किरण
नवगछिया छोर पर बनाए गए चौथे बेली ब्रिज के स्थान पर जब दोपहर में 200 टन वजनी भारी स्टील गर्डर को चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हुई, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें इस ऐतिहासिक बदलाव को देखने लगीं. लगभग 24 मीटर लंबे इस विशाल और बेहद मजबूत स्टील गर्डर की लांचिंग के साथ ही पुल को नई मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठा लिया गया है.
क्रेन और आधुनिक उपकरणों की मदद से जारी इस काम की निगरानी खुद बड़े अधिकारी कर रहे हैं. इस भारी गर्डर के लगने के बाद इस हिस्से से गुजरने वाले भारी वाहनों का भार झेलने की पुल की क्षमता में अभूतपूर्व इजाफा होगा.
विशेष मशीनों से काटा जा रहा तीसरा क्षतिग्रस्त स्लैब
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की विशेषज्ञ कंसल्टेंट एजेंसी ने क्षतिग्रस्त हिस्से सहित कुल चार स्लैब की नई और अत्याधुनिक डिजाइन तैयार करके विभाग को सौंप दी है. इसी स्वीकृत डिजाइन के आधार पर पुनर्स्थापन का जिम्मा संभाल रही निर्माण एजेंसी एसपी सिंगला कंपनी ने एक विस्तृत वर्कप्लान तैयार किया है. हर एक सेगमेंट के लिए अलग-अलग विशेषज्ञ टीमें मैदान में उतारी गई हैं.
इस प्रक्रिया में दूसरे स्लैब का काम लगभग पूरा हो चुका है और अब सबसे चुनौतीपूर्ण माने जाने वाले तीसरे स्लैब को हटाने की कवायद तेज कर दी गई है. कंक्रीट की कटिंग को आसान बनाने के लिए कैंटीलीवर के साथ-साथ स्पैन में बड़े-बड़े छेद करके ड्रिलिंग की जा रही है, ताकि बिना किसी जोखिम के क्षतिग्रस्त कंक्रीट को योजनाबद्ध तरीके से निकाला जा सके.
रोज-रोज के जाम से परेशान लोगों को मिलेगी स्थायी राहत
विक्रमशिला सेतु सिर्फ दो छोरों को जोड़ने वाला पुल नहीं है, बल्कि यह भागलपुर, नवगछिया, सीमांचल और पूर्वोत्तर राज्यों के बीच व्यापार और स्वास्थ्य सेवाओं की मुख्य सांस है. लंबे समय से स्लैब के क्षतिग्रस्त होने और अस्थायी बेली ब्रिज के कारण गाड़ियों की रफ्तार पूरी तरह थम जाती थी. एंबुलेंस में तड़पते मरीजों से लेकर स्कूल जाते बच्चों और व्यापारी वर्ग को इस सेतु पर रोज घंटों फंसे रहना पड़ता था.
आम लोगों की इसी बड़ी समस्या और प्रशासनिक जवाबदेही को देखते हुए अधिकारी लगातार जमीनी स्तर पर मुस्तैद हैं. पुल निर्माण निगम के सचिव (योजना एवं प्रशासन) शशिभूषण सिंह और एसडीओ अमन कुमार ने खुद निर्माण स्थल पर पहुंचकर कार्यों की बारीकी से समीक्षा की. इस दौरान एसपी सिंगला कंपनी के परियोजना निदेशक अनिल कुमार सिंह ने उन्हें कार्ययोजना की पल-पल की प्रगति रिपोर्ट सौंपी.
Vikramshila Setu Bhagalpur Restoration: 31 दिसंबर और मकर संक्रांति की दो बड़ी डेडलाइन
इस महाअभियान की सबसे खास बात इसकी तय समय-सीमा है. सचिव शशिभूषण सिंह ने स्पष्ट किया कि निर्धारित रणनीति के तहत ही पुनर्स्थापन का पूरा खाका तैयार किया गया है. प्रशासन ने योजना बनाई है कि 31 दिसंबर तक पुल के सभी भारी और मुख्य निर्माण कार्यों को हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा.
इसके बाद बचे हुए फिनिशिंग कार्यों को तेजी से निपटाते हुए आगामी मकर संक्रांति के पावन पर्व तक विक्रमशिला सेतु को पूरी तरह से सुगम और सुरक्षित यातायात के लिए समर्पित कर देने का लक्ष्य रखा गया है. इस खबर के सामने आने से भागलपुर और आसपास के जिलों में खुशी की लहर है और लोगों को उम्मीद जगी है कि नया साल उनके लिए बिना जाम का सुहाना सफर लेकर आएगा.
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