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दुनिया का 450 साल पुराना नक्शा बदल गया! UN में अमेरिका अकेला पड़ा, अब ऐसे दिखेगा भारत-अफ्रीका

क्या आपने कभी सोचा है… क्या आपका World Map आपको दुनिया गलत दिखाता है?
स्कूल की Geography की किताब खोलिए.
दीवार पर लगा World Map देखिए.
Greenland बहुत बड़ा दिखता है. Europe भी विशाल नजर आता है.
और Africa?
कई बार वह Greenland के आसपास ही दिखता है.
लेकिन असली दुनिया ऐसी बिल्कुल नहीं है.
अब संयुक्त राष्ट्र ने इसी पुराने नजरिए को चुनौती दी है.
UN में हुआ बड़ा फैसला
4 सितंबर 2026 को UN General Assembly ने 'Correct the Map' नाम के प्रस्ताव को मंजूरी दी.
वोट का आंकड़ा चौंकाने वाला था-
164 देश — पक्ष में
1 देश — विरोध में
6 देश — अनुपस्थित/abstain
विरोध में अकेला देश था— अमेरिका.
लेकिन यहां एक जरूरी बात है.
UN ने दुनिया के सभी maps पर प्रतिबंध नहीं लगाया है.
यह एक non-binding resolution है, जो ज्यादा accurate, equal-area maps के इस्तेमाल को बढ़ावा देता है.
आखिर पुराने Map में समस्या क्या है?
जिस नक्शे को दुनिया सबसे ज्यादा पहचानती है, उसे कहते हैं-
Mercator Projection
इसे Flemish cartographer Gerardus Mercator ने 1569 में बनाया था.
उस समय इसका मकसद दुनिया को सुंदर दिखाना नहीं था.
यह समुद्री यात्रियों के लिए बेहद उपयोगी था.
इसकी खासियत थी कि दिशा और कोणों को इस तरह दिखाया गया कि sailors के लिए navigation आसान हो सके.
समस्या तब पैदा होती है जब इसी projection को पूरी दुनिया के क्षेत्रफल की तुलना करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
और यहीं आता है Greenland का असली राज
Mercator Map पर Greenland देखकर आपको क्या लगता है?
शायद-
'लगभग Africa जितना बड़ा!'
लेकिन वास्तविकता?
Africa, Greenland से करीब 14 गुना बड़ा है.
यानी नक्शे पर दोनों लगभग बराबर दिख सकते हैं, लेकिन जमीन पर कहानी बिल्कुल अलग है.
इसी तरह जैसे-जैसे आप Equator से दूर जाते हैं, land masses का apparent size बढ़ता जाता है.
तो Africa असल में कितना बड़ा है?
Africa को आप सिर्फ एक continent समझकर आगे बढ़ जाते हैं.
लेकिन उसके भीतर इतनी जमीन है कि-
United States + China + India + Japan + Mexico और यूरोप के बड़े हिस्से को मिलाकर भी जगह बच सकती है.
यही वजह है कि African countries लंबे समय से कह रहे हैं-
'हमें दुनिया के नक्शे पर भी वास्तविक आकार में दिखाइए.'
नया Map क्या करेगा?
अब चर्चा है Equal Earth projection की.
इसे 2018 में cartographers की एक international team ने विकसित किया था.
इसका मुख्य उद्देश्य है-
महाद्वीपों के relative area को ज्यादा सही तरीके से दिखाना.
इसमें Africa का आकार Mercator की तुलना में बहुत ज्यादा वास्तविक दिखाई देता है.
Greenland छोटा नजर आएगा.
Europe भी अपेक्षाकृत छोटा होगा.
और Africa अपनी वास्तविक विशालता के कहीं करीब दिखेगा.
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लेकिन क्या नया Map भी 100% Perfect है?
नहीं.
यही Geography का सबसे दिलचस्प हिस्सा है.
पृथ्वी गोल है.
लेकिन हमारा paper, screen या classroom map सपाट है.
इसलिए कोई भी flat map पृथ्वी को पूरी तरह distortion-free नहीं दिखा सकता.
एक projection area को बेहतर दिखाएगा, दूसरा shape को, तीसरा distance या direction को.
Equal Earth का फायदा यह है कि यह area को ज्यादा सही तरीके से preserve करता है, लेकिन यह भी globe की हर विशेषता को perfect नहीं दिखाता.
फिर Africa इस बदलाव पर इतना जोर क्यों दे रहा है?
क्योंकि African countries के लिए यह सिर्फ Geography की बहस नहीं है.
उनका तर्क है कि नक्शे सिर्फ जमीन नहीं दिखाते.
नक्शे हमारी मानसिक तस्वीर बनाते हैं.
बच्चा जिस Africa को बार-बार छोटा देखता है, वह उसके वास्तविक geographical scale को कम समझ सकता है.
इसीलिए African Union ने #CorrectTheMap campaign का समर्थन किया.
अभियान का संदेश था-
'A fair world begins with a fair map.'
क्या यह ‘Cartographic Colonialism’ है?
यहीं से कहानी Geography से निकलकर geopolitics में पहुंचती है.
आलोचक Mercator projection को Eurocentric नजरिए से जोड़ते हैं.
उनका कहना है कि Northern Hemisphere के देशों का exaggerated visual size और Equatorial regions का छोटा दिखना दुनिया की collective imagination को प्रभावित कर सकता है.
कुछ activists इसे- Cartographic Colonialism तक कहते हैं.
हालांकि यहां सावधानी जरूरी है:
Mercator projection मूल रूप से colonial propaganda बनाने के लिए नहीं बनाया गया था.
इसका मूल उद्देश्य maritime navigation था.
लेकिन बाद में इसके व्यापक educational और political इस्तेमाल ने इसके visual effects पर बहस जरूर पैदा की.
और फिर UN में अमेरिका अकेला क्यों पड़ा?
यह कहानी का सबसे राजनीतिक हिस्सा है.
164 देशों ने resolution का समर्थन किया.
अमेरिका ने विरोध किया.
Washington ने इस पहल को एक ideological project बताते हुए कहा कि UN को वास्तविक global problems पर ध्यान देना चाहिए.
लेकिन African countries के लिए यह सिर्फ नक्शा नहीं है.
यह इस बड़े सवाल का हिस्सा है-
दुनिया को Global North के नजरिए से देखा जाए या Global South के नजरिए से भी?
भारत ने क्या किया?
भारत ने इस resolution का समर्थन किया.
और भारत के लिए यह बहस दिलचस्प है.
क्योंकि भारत खुद Global South की आवाज को मजबूत करने की बात करता रहा है.
ऐसे में Africa की यह पहल केवल Geography का मुद्दा नहीं रह जाती.
यह representation, historical perception और Global South की agency की बहस से भी जुड़ जाती है.
नक्शा बदला नहीं… नजरिया बदलने की कोशिश है
1569 में Mercator ने दुनिया को sailors के लिए map किया था.
2026 में Africa दुनिया को अपने वास्तविक आकार में देखने की मांग कर रहा है.
164 देश इसके साथ खड़े हुए.
अमेरिका अकेला विरोध में रहा.
लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात शायद यह है-
Africa कल भी उतना ही बड़ा था.
भारत कल भी उतना ही बड़ा था.
Greenland कल भी उतना ही छोटा था.
बदला सिर्फ नक्शा नहीं है…
दुनिया को देखने का हमारा नजरिया बदलने की कोशिश है.
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