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सीहोर में किसान पर लाठी-तलवारों से हमला, मौत:4 साल की पोती समेत 4 घायल, बेटे का कान कटा; पुलिस पर मदद नहीं करने का आरोप
सीहोर जिले की भेरूंदा तहसील के एक गांव में जमीन के पट्टे की लिखा-पढ़ी को लेकर हुए विवाद के बाद एक किसान की मौत हो गई। मंगलवार रात घर में खाना खा रहे 50 वर्षीय रामद्वार मेहर पर लाठी-डंडों और तलवारों से हमला किया गया। उन्हें बचाने आए परिवार के सदस्यों को भी पीटा गया। हमले में किसान के सिर में गंभीर चोट आई, बेटे का कान कट गया और पोती का पैर टूट गया। गंभीर रूप से घायल किसान ने बुधवार सुबह भोपाल के हमीदिया अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। परिजनों ने पुलिस चौकी पर समय रहते मदद नहीं मिलने का आरोप लगाया है। घर में खाना खाते समय हमला परिजनों के मुताबिक, मंगलवार रात परिवार घर में था। किसान रामद्वार मेहर पिता बलराम प्रसाद (50) खाना खा रहे थे, तभी संतोष, उसका बेटा रितेश, बलराम, दुर्गेश समेत अन्य लोग वहां पहुंचे। आरोप है कि हमलावर लाठी-डंडों और तलवारों से लैस थे। उन्होंने घर में घुसकर परिवार पर हमला कर दिया। रामद्वार को संभलने का मौका तक नहीं मिला। उन्हें बचाने के लिए परिवार के लोग आगे आए तो हमलावरों ने उन पर भी हमला किया। इस दौरान घर में तोड़फोड़ भी की गई। पट्टे की लिखा-पढ़ी के दौरान शुरू हुआ विवाद मृतक के बेटे अरुण के मुताबिक, गांव में जमीनों के पट्टे बनाने का काम चल रहा है। 26 अक्टूबर को पटवारी गांव आया था। इस दौरान उनकी जमीन के पट्टे के लिए लिखा-पढ़ी की जा रही थी। आरोप है कि वहां मौजूद संतोष ने धक्का लगने की बात पर विवाद शुरू कर दिया। अरुण का कहना है कि संतोष उम्र में उनसे बड़ा था, इसलिए वह विवाद बढ़ाए बिना वहां से चले गए। बाद में उन्होंने अपने पिता को घटना के बारे में बताया। उनके पिता ने संतोष को समझाया था। अरुण का आरोप है कि इसी बात से नाराज होकर आरोपियों ने तीन दिन बाद मंगलवार रात उनके घर पर हमला कर दिया। बेटे का कान कटा, मासूम का पैर टूटा अरुण के मुताबिक, हमले में उनका एक कान कट गया, जबकि उनकी चार साल की बेटी का पैर टूट गया। उनकी मां और बहन को भी चोटें आईं। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण रामद्वार मेहर को इलाज के लिए हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बुधवार सुबह इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस चौकी से मदद नहीं मिलने का आरोप अरुण ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि हमले के तुरंत बाद वह गांव के पास स्थित लाड़कुई पुलिस चौकी पहुंचे और घटना की सूचना दी। उस समय हमलावर उनके घर में तोड़फोड़ कर रहे थे। अरुण के मुताबिक, चौकी पर करीब पांच पुलिसकर्मी मौजूद थे, लेकिन मदद के लिए भेजने के बजाय उन्हें भेरूंदा थाने जाकर शिकायत करने की सलाह दी गई। उनका आरोप है कि यदि समय रहते पुलिस मदद के लिए पहुंचती तो शायद परिवार को इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। घटना के बाद परिवार में मातम है। किसान की मौत और परिवार के अन्य सदस्यों के घायल होने से परिजन सदमे में हैं। पुलिस की ओर से घटना, आरोपियों की भूमिका और चौकी पर सूचना दिए जाने के बाद कार्रवाई में कथित देरी की पुष्टि होना बाकी है।