Thursday, 22 October 2026
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national · दिल्ली

अंतरिक्ष में पहली बार मिला हरे रंग का तारा, ग्रहों के मलबे ने बदली रोशनी, सोडियम-हीलियम की टक्कर से बना चार्टरेज कलर

INT News22 October 2026 at 09:58 am

पृथ्वी से करीब 280 प्रकाश वर्ष दूर ड्रेको तारामंडल में मौजूद सफेद बौना (White Dwarf) तारा डब्ल्यूडी जे 1330 प्लस 6435 हल्का हरा यानी चार्टरज रंग का दिखायी देता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह अंतरिक्ष में अब तक दर्ज पहला हरे रंग का तारा है. खास बात यह है कि इसके बाहरी हिस्से में मिले कैल्शियम, लिथियम और सोडियम जैसे तत्व उन ग्रहों के टूटे हुए अवशेष हैं, जो कभी इस तारे के आसपास चक्कर लगाते थे.

ग्रहों के मलबे ने बदली तारों की रोशनी

डब्ल्यूडी जे 1330 प्लस 6435 कभी किसी ग्रह- तंत्र का हिस्सा रहा होगा. समय के साथ उसके आसपास मौजूद ग्रहों के टुकड़े तारे में समाते गये. इन अवशेषों से आये तत्व अब तारे की बाहरी परत में मौजूद है. इनमें सोडियम की भूमिका सबसे अहम है. सामान्य स्थिति में सोडियम नारंगी रंग की रोशनी सोखता है. इससे सोडियम वाली स्ट्रीट लाइट नारंगी दिखती हैं. लेकिन सफेद बौने की बेहद धनी परिस्थितियों में कहानी बदल जाती है. यहां सोडियम के परमाणु हीलियम से टकराते रहते हैं और उनकी प्रकाश सोखने की क्षमता बदल जाती है.

हीलियम से टक्कर, फिर दिखने लगा हरा रंग

वैज्ञानिकों के मुताबिक, सफेद बौने के भीतर अत्यधिक घनत्व के कारण सोडियम और हीलियम के परमाणुओं के बीच लगातार टक्कर होती रहती है. इससे सोडियम पीली, नारंगी और लाल रोशनी के कुछ हिस्सों को भी सीखने लगता है. नतीजतन तारे से निकलने वाली रोशनी के रंगों का संतुलन बदल जाता है और वह हरा-पीला यानी चार्टरेज दिखायी देने लगता है. सामान्य तारों में ऐसा रंग नहीं देखा जाता.

पृथ्वी जितना आकार सूरज जितना भारी

सफेद बौने किसी तारे के जीवन के अंतिम चरण में बनते हैं. इनका आकार लगभग पृथ्वी जितना हो सकता है, लेकिन इनमें पदार्थ की मात्रा बेहद अधिक होती है. आम तौर पर इनमें सूरज के करीब आधे द्रव्यमान के बराबर पदार्थ मौजूद हो सकता है. वैज्ञानिकों ने 65 प्रकाश वर्ष के दायरे में मौजूद 151 सफेद बौनी का अध्ययन किया. इनमें ज्यादातर सफेद थे.

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एक तारा गुलाबी, वजह कार्बन

पृथी से करीब 48 प्रकाश वर्ष दूर लियो माइनर तारामंडल में मौजूद डब्ल्यूडी जे 1011प्लस 2845 हल्का गुलाबी दिखायी देता है. इसके रंग के पीछे सोडियम नहीं. बल्कि कार्बन की भूमिका है.