Thursday, 22 October 2026
INTइंडियन न्यूज़ ट्रस्टजहाँ सत्य मिले विश्वास से
ताज़ा खबरें

समाचार · उत्तर प्रदेश

प्रयागराज: 43 साल पुराने सामूहिक दुष्कर्म मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला, तीन आरोपी बरी

INT News22 October 2026 at 11:38 am

Allahabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने करीब 43 साल पुराने सामूहिक दुष्कर्म मामले में तीन अभियुक्तों को बरी कर दिया है. न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद की एकलपीठ ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को निरस्त करते हुए यह फैसला दिया. अदालत ने कहा कि यौन अपराधों से जुड़े मामलों में पीड़िता का बयान महत्वपूर्ण साक्ष्य होता है, लेकिन उसकी विश्वसनीयता और घटना की परिस्थितियों के साथ उसकी संगति का आकलन करना भी आवश्यक है. यह मामला 17 अक्टूबर 1983 की रात फतेहपुर जिले के बिंदकी क्षेत्र में हुई कथित घटना से जुड़ा है.

पीड़िता की गवाही और साक्ष्यों का आकलन जरूरी

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि चिकित्सकीय साक्ष्य का न मिलना या शरीर पर चोट के निशान नहीं होना अपने आप में आरोपों को खारिज करने का पर्याप्त आधार नहीं है. हालांकि, जब गवाही में अन्य विसंगतियां भी सामने आती हैं, तो सभी उपलब्ध साक्ष्यों का समग्र मूल्यांकन करना जरूरी होता है. अदालत ने इसी सिद्धांत के तहत मामले की परिस्थितियों और गवाहों के बयानों की समीक्षा की. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर विचार किया गया, जिसके बाद निचली अदालत की दोषसिद्धि को निरस्त कर दिया गया.

फतेहपुर के बिंदकी क्षेत्र से जुड़ा था मामला

अभियोजन के अनुसार, घटना 17 अक्टूबर 1983 की रात फतेहपुर जिले के बिंदकी क्षेत्र में हुई थी. मामले में दो महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म किए जाने का आरोप लगाया गया था. दोनों महिलाएं आपस में ननद-भाभी थीं. आरोप था कि चार नामजद अभियुक्त दो अन्य लोगों के साथ उनके घर में घुसे थे. कथित तौर पर आरोपितों ने तमंचा दिखाकर परिवार के सदस्यों को धमकाया और इसके बाद वारदात को अंजाम दिया. घटना के बाद मामला दर्ज हुआ और आरोपितों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया शुरू हुई थी.

निचली अदालत की सजा को दी गई थी चुनौती

इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने 22 अप्रैल 1985 को अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी. इसके बाद फैसले को चुनौती देते हुए अपील दाखिल की गई. अपील की सुनवाई के दौरान पीड़िताओं के बयानों में घटना के क्रम, आरोपितों की भूमिका और परिवार के सदस्यों को रोकने के तरीके से संबंधित अंतर सामने आए. हाईकोर्ट ने इन विसंगतियों समेत उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया. अदालत ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद तीन अभियुक्तों की दोषसिद्धि निरस्त कर उन्हें बरी करने का आदेश दिया.

Must Read: प्रयागराज-लखनऊ में कुत्तों के हमलों पर हाईकोर्ट सख्त, डॉग बाइट हॉटस्पॉट चिह्नित करने का आदेश