समाचार · महाराष्ट्र
लाडकी बहिण योजना: सितंबर की किस्त के लिए ₹344 करोड़ मंजूर, 81 लाख महिलाओं को भी मिल सकता है रुकी किस्त का लाभ

महाराष्ट्र की मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना का लाभ लेने वाली महिलाओं के लिए अहम खबर है. राज्य सरकार ने योजना के तहत अनुसूचित जाति (SC) वर्ग की पात्र महिलाओं को सितंबर महीने की किस्त देने के लिए ₹344.62 करोड़ का फंड मंजूर किया है. 28 अक्टूबर 2026 को जारी शासन निर्णय के मुताबिक, यह राशि वित्त वर्ष 2026-27 के अनुसूचित जाति उपयोजना के बजट से उपलब्ध कराई जाएगी.
इसी बीच, ई-केवाईसी पूरी नहीं होने के कारण योजना का लाभ बंद होने वाली महिलाओं का मामला भी सामने आया है. किसान सभा के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने करीब 81 लाख महिलाओं को दोबारा लाभ देने के मुद्दे पर सकारात्मक आश्वासन दिया है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ई-केवाईसी पोर्टल दोबारा शुरू करने और पात्र महिलाओं का रुका हुआ भुगतान बहाल करने की मांग पर चर्चा हुई है.
सितंबर की किस्त के लिए ₹344.62 करोड़ मंजूर
लाडकी बहिण योजना के तहत अनुसूचित जाति वर्ग की पात्र महिलाओं को सितंबर महीने का लाभ देने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने ₹344.62 करोड़ की राशि मंजूर की है. 28 अक्टूबर को जारी शासन निर्णय में इस राशि के वितरण को प्रशासनिक मंजूरी दी गई है.
81 लाख महिलाओं को दोबारा मिल सकता है ₹1,500 का लाभ?
लाडकी बहिण योजना की करीब 81 लाख लाभार्थी महिलाओं को ई-केवाईसी से जुड़ी समस्याओं के कारण लाभ नहीं मिल पाने का मुद्दा भी चर्चा में है. हालिया मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, किसान सभा के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने यह मामला उठाया था.
प्रतिनिधिमंडल के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने प्रभावित महिलाओं को दोबारा हर महीने ₹1,500 का लाभ देने के संबंध में आश्वासन दिया. ई-केवाईसी पोर्टल फिर से खोलने और ई-केवाईसी पूरी होने के बावजूद भुगतान नहीं मिलने वाली पात्र महिलाओं का लाभ बहाल करने की मांग भी रखी गई.
ये भी पढे़ं: Maharashtra Weather: महाराष्ट्र में अगले 2 दिन बदलेगा मौसम, IMD ने जारी किया अलर्ट; जानें मुंबई-पुणे का हाल
हर महीने कितने रुपये मिलते हैं?
महाराष्ट्र सरकार की आधिकारिक योजना वेबसाइट के मुताबिक, मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने ₹1,500 की आर्थिक सहायता सीधे बैंक खाते में दी जाती है. यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाती है.