समाचार · छत्तीसगढ़
नक्सलमुक्त बस्तर...पहली बार डेनमार्क से वाटरफॉल देखने पहुंचे विदेशी पर्यटक:झिरका के जंगल में चीटियों की चटनी का चखा स्वाद, महुआ दारू बनता देख कहा- अमेजिंग बस्तर
बस्तर नक्सल मुक्त हो गया है। अब दंतेवाड़ा जिले के झिरका गांव में पहली बार डेनमार्क के चार विदेशी पर्यटक पहुंचे। यहां उन्होंने झारालावा जलप्रपात का प्राकृतिक सौंदर्य देखा और बस्तर की जनजातीय संस्कृति, खानपान और ग्रामीण जीवनशैली को करीब से जाना। पर्यटकों ने लाल चीटियों से बनी पारंपरिक चापड़ा चटनी बनाने की प्रक्रिया समझी और उसका स्वाद भी चखा। इसके साथ ही महुआ शराब बनाने की पारंपरिक प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली। 30 अक्टूबर को झिरका गांव पहुंचे विदेशी पर्यटकों का स्थानीय पर्यटन समिति और ग्रामीणों ने स्वागत किया। भ्रमण के दौरान पर्यटकों ने ग्रामीणों से बातचीत की और बस्तर के पारंपरिक खानपान के बारे में जानकारी ली। उन्होंने चापड़ा चटनी बनाने की पूरी प्रक्रिया देखी। ग्रामीणों ने उन्हें इसके पारंपरिक तरीके और स्थानीय खानपान में इसके महत्व के बारे में बताया। जिसके बाद विदेशी पर्यटकों ने कहा बस्तर अमेजिंग है। महुआ शराब बनाने की प्रक्रिया भी समझी पर्यटकों ने गांव का भ्रमण कर यहां की रहन-सहन और पारंपरिक गतिविधियों को देखा। इस दौरान उन्होंने महुआ शराब बनाने की प्रक्रिया भी समझी। ग्रामीणों से महुआ से जुड़ी स्थानीय परंपराओं और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी ली। विदेशी पर्यटकों के पहुंचने से बढ़ेगी पहचान झिरका में डेनमार्क के पर्यटकों का यह पहला आगमन है। झारालावा जलप्रपात के साथ यहां की जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक खानपान ग्रामीण पर्यटन के लिहाज से खास पहचान रखते हैं। पर्यटन समिति और ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस तरह विदेशी पर्यटकों के पहुंचने से क्षेत्र के पर्यटन स्थलों को पहचान मिलेगी। साथ ही स्थानीय लोगों के लिए गाइड, खानपान और अन्य पर्यटन गतिविधियों से रोजगार के अवसर भी बन सकते हैं।