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लालबर्रा में 13 दिन बाद सरस्वती महोत्सव का समापन:वैनगंगा में प्रतिमा विसर्जित; अखाड़ों ने किया प्रदर्शन, देवताओं की झांकियां निकलीं
बालाघाट जिले के लालबर्रा में नवरात्र की पंचमी से शुरू हुए सरस्वती महोत्सव का बुधवार रात प्रतिमा विसर्जन के साथ समापन हो गया। 13 दिनों तक चले इस महोत्सव में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ मेले का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोग पहुंचने। तीन किलोमीटर चली विसर्जन यात्रा मां सरस्वती की प्रतिमा की विसर्जन यात्रा करीब तीन किलोमीटर तक चली। इसके बाद प्रतिमा का वैनगंगा नदी में विसर्जन किया गया। यात्रा में लालबर्रा शहर के सैकड़ों लोग शामिल हुए। इस दौरान अखाड़ों के कलाकारों ने लट्ठ प्रदर्शन, आग के घेरे से गुजरने और हाथ में रखे नारियल को लट्ठ से फोड़ने जैसे करतब दिखाए। भगवान हनुमान और गणेश की झांकियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। श्रद्धालु डीजे और धुमाल की धुन पर नाचते हुए मां सरस्वती को विदाई देते नजर आए। 1990 में महोत्सव की शुरुआत का दावा सरस्वती महोत्सव समिति से जुड़े रामेश्वर बसेने के अनुसार, मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित करने और महोत्सव के रूप में आयोजन की शुरुआत आरक्षण विरोधी आंदोलन के दौर में हुई थी। उन्होंने बताया की इसकी शुरुआत 23 जनवरी 1990 को हुई थी। समिति के संरक्षक और कोषाध्यक्ष कैलाश अग्रवाल के मुताबिक, वर्ष 1990 में 15 से 18 साल की उम्र के स्कूली छात्रों ने छोटे स्तर पर इस आयोजन की शुरुआत की थी। बैलगाड़ियों से आते थे ग्रामीण सालों पहले क्षेत्र के ग्रामीण प्रतिमा के दर्शन और आयोजन में शामिल होने के लिए बैलगाड़ियों से लालबर्रा पहुंचते थे। उस समय क्षेत्र में वाहनों की उपलब्धता सीमित होने के कारण बैलगाड़ी यात्रा का एक प्रमुख साधन थी।