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जमुई: 70 साल बाद भी सड़क नहीं बनी, मेड़ से होकर स्कूल जाते हैं बच्चे, पर नहीं टूटी पढ़ाई की आस

शिक्षा और ग्रामीण विकास के तमाम दावों के बीच लक्ष्मीपुर प्रखंड के कमलू गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय बुनियादी सुविधा के लिए तरस रहा है. साल 1956 में स्थापित इस विद्यालय के सात दशक बीत जाने के बाद भी यहां तक पहुंचने के लिए महज 700 मीटर पक्की सड़क का निर्माण नहीं हो सका है. नतीजतन विद्यालय में नामांकित करीब 130 छात्र-छात्राओं को रोज खेतों की मेड़ और ऊबड़-खाबड़ पगडंडियों से होकर गुजरना पड़ता है.
विद्यालय पहुंचने का यह दुर्गम रास्ता बच्चों के लिए किसी कड़ी परीक्षा से कम नहीं है. बारिश और सर्दी के मौसम में स्कूली बच्चों की मुसीबतें कई गुना बढ़ जाती हैं.
बारिश में कीचड़ और सर्दी में जहरीले जीवों का डर
बरसात के दिनों में खेतों में पानी भरने से पगडंडियां पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो जाती हैं. इस दौरान बच्चों के फिसलकर गिरने और उनके कपड़े व किताबें खराब होने का अंदेशा बना रहता है. दुर्घटना की आशंका के कारण परिजन भी बच्चों को स्कूल भेजने से डरते हैं.
वहीं सर्दियों में ओस के चलते रास्ता बेहद फिसलन भरा हो जाता है. पगडंडी के दोनों ओर उगी घनी झाड़ियों और लंबी घास से जहरीले जीव-जंतुओं के हमले का जोखिम रहता है. इन तमाम खतरों के बावजूद बच्चे रोज इसी रास्ते से आने को विवश हैं.
प्रधानाध्यापक ने भेजी रिपोर्ट, बीडीओ ने दिया आश्वासन
विद्यालय के प्रधानाध्यापक प्रेम दत्त रेणू दास के अनुसार पदस्थापन के बाद से ही उन्होंने बच्चों की समस्याओं को देखते हुए वरीय अधिकारियों को कई बार पक्की सड़क निर्माण के लिए पत्र लिखा है. इसके बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है. ग्रामीणों ने भी विद्यालय के 70 साल पूरे होने पर भी सड़क न बनने को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है.
लक्ष्मीपुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रेम प्रकाश ने मामले पर संज्ञान लेते हुए बताया कि विद्यालय तक पहुंच पथ न होने की सूचना मिली है. उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग से समन्वय स्थापित कर सड़क निर्माण के लिए जल्द ही लिखित प्रस्ताव भेजा जाएगा.
मुश्किलों पर भारी बच्चों का हौसला
रास्ते की विकट परिस्थितियों के बावजूद कमलू गांव के बच्चों का पढ़ाई के प्रति समर्पण कम नहीं हुआ है. धूप, कीचड़ और ठंड से जूझते हुए वे हर दिन कक्षा में उपस्थित होते हैं. ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि नौनिहालों के सुरक्षित भविष्य के लिए इस 700 मीटर सड़क का निर्माण अविलंब कराया जाए.