Monday, 14 September 2026
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झारखंड में जल जीवन मिशन की रफ्तार सुस्त, 75% आदिवासी बहुल गांव अब भी नल के शुद्ध पानी से दूर

INT News14 September 2026 at 09:46 am

Jharkhand Tribal Villages Tap Water Scheme: झारखंड के आदिवासी बहुल गांवों में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन और धरती आबा जनजातीय उत्कर्ष अभियान की जमीनी हकीकत बेहद लचर है. राज्य के करीब 75 प्रतिशत आदिवासी बहुल गांवों में आज भी नल से शुद्ध पेयजल की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पायी है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार निर्धारित लक्ष्यों के मुकाबले धरातल पर काम काफी सुस्त गति से चल रहा है. राज्य में कुल 7,107 आदिवासी बहुल गांव हैं, जिनमें से अब तक केवल 1,804 गांवों में ही नल से पेयजल पहुंचाया जा सका है. जिन जिलों में आदिवासी बहुल गांवों की संख्या सबसे अधिक है, वहां स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है. राजधानी रांची सहित गुमला, दुमका, पूर्वी सिंहभूम, साहिबगंज, गोड्डा और पाकुड़ जैसे जिलों में योजना का हाल बेहाल है.

गांवों में नल-जल योजना की रफ्तार बेहद धीमी

राजधानी रांची के आदिवासी बहुल गांवों में से मात्र 13 प्रतिशत को ही यह सुविधा मिल पायी है. वहीं, पूर्वी सिंहभूम में यह आंकड़ा महज पांच प्रतिशत पर सिमट गया है. पाकुड़ और साहिबगंज जिलों में स्थिति बदतर है. पाकुड़ में 235 आदिवासी बहुल गांव हैं, लेकिन नल से शुद्ध पेयजल की सुविधा सिर्फ दो गांवों तक ही पहुंच सकी है, जो एक प्रतिशत से भी कम है. साहिबगंज में 399 आदिवासी बहुल गांवों में से केवल तीन गांवों में नल से जल पहुंचाया गया है.

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पीएम ने हजारीबाग से दो साल पहले शुरू की थी योजना

धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान की शुरुआत दो दो अक्टूबर 2024 को को हुई थी. पीएम नरेंद्र मोदी ने झारखंड के हजारीबाग से इस अभियान का शुभारंभकिया था. इसका उद्देश्य जनजातीय (आदिवासी) बहुल गांवों में बुनियादी सुविधाओं, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और आजीविका की कमियों को दूर करना है. इसके तहत 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 549 जिलों के लगभग 63,843 गांवों को शामिल किया गया है. इस योजना के लिए पांच वर्षों (2024-25 से 2028-29) में कुल 79, 156 करोड़ रुपये खर्च किये जाने का प्रावधान है. इस अभियान में 17 संबंधित मंत्रालयों द्वारा कार्यान्वित 25 पहल शामिल हैं.

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योजना की स्थिति एक नजर में