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UP Success Story: लखनऊ में पिज्जा कल्चर को दे रही हैं नई पहचान, 'नान' के तानों से लेकर 2.3 लाख के मुनाफे तक, पढ़ें अक्षिता की कहानी

Woman Entrepreneur Success Story: गुरुग्राम की नौकरी छोड़ लखनऊ में अपना स्टार्टअप शुरू करने वाली अक्षिता गोयल की कहानी हर उस इंसान के लिए प्रेरणा है, जो लीक से हटकर अपनी पहचान बनाना चाहता है. 5 साल की कॉर्पोरेट नौकरी के बाद अपनी ₹12 लाख की पूरी बचत लगाकर शुरू किया गया उनका पिज्जा ब्रांड 'NAPO' आज सफलता की नई इबारत लिख रहा है. शुरुआती नुकसान, शेफ के अचानक काम छोड़ने और कई असफल ट्रायल्स जैसी मुश्किलों को मात देकर अक्षिता ने महज 6 महीने में ₹5.6 लाख प्रति माह के रेवेन्यू और ₹2.3 लाख के शुद्ध मुनाफे का आंकड़ा हासिल कर लिया है.
गुरुग्राम की नौकरी छोड़ लखनऊ में शुरू किया अपना स्टार्टअप
अक्षिता गोयल कम्युनिकेशन डिजाइन में ग्रेजुएट हैं. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने गुरुग्राम की टेक कंपनी गार्टनर में ग्राफिक्स डिजाइनर के रूप में काम करना शुरू किया. करीब पांच साल तक कॉर्पोरेट सेक्टर में नौकरी करने के बाद जुलाई 2025 में वह अपने पारिवारिक कारोबार में सहयोग करने के लिए लखनऊ लौट आई. हालांकि, वह अपनी अलग पहचान बनाना चाहती थीं. इसी दौरान उन्होंने पिज्जा कारोबार में एक ऐसा अवसर देखा, जहां प्रीमियम क्वालिटी और किफायती कीमत के बीच संतुलन बनाया जा सकता था.
12 लाख रुपये की बचत से खड़ा किया NAPO
अक्षिता ने महसूस किया कि बाजार में एक तरफ महंगे रेस्तरां में मिलने वाला प्रीमियम नेपोलिटन पिज्जा है, तो दूसरी ओर सामान्य स्ट्रीट पिज्जा की क्वालिटी वैसी नहीं है. उन्होंने इसी अंतर को अपनी बिजनेस आइडिया बनाया. नवंबर 2025 में इस दिशा में काम शुरू किया और अपनी 12 लाख रुपये की बचत लगाकर अप्रैल 2026 में NAPO की शुरुआत की. लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी में उन्होंने 12x7 फीट का कस्टम-बिल्ट ट्रेलर तैयार कराया, जिसमें लाइव ओपन किचन की व्यवस्था की गई.
शुरुआत में हुआ नुकसान, पिज्जा के स्वाद को बेहतर बनाने में लगे तीन महीने
फूड एंड बेवरेज इंडस्ट्री में अक्षिता का पहले कोई अनुभव नहीं था. ऐसे में कारोबार शुरू करने के बाद उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा. पहले ही महीने में करीब 1.5 लाख रुपये का नुकसान हुआ. कुछ ग्राहकों ने उनके पिज्जा के डो की तुलना नान और सब्जी से कर दी. इसके बाद अक्षिता ने प्रोडक्ट की गुणवत्ता सुधारने पर ध्यान दिया. उन्होंने अपने पहले शेफ के साथ लगभग तीन महीने तक काम किया और बेहतर स्वाद व टेक्सचर हासिल करने के लिए लगातार प्रयोग किए.
50 से ज्यादा बार किया रेड सॉस का ट्रायल
पिज्जा को बेहतर बनाने के लिए अक्षिता ने उसकी हर छोटी-बड़ी चीज पर काम किया. सिर्फ रेड सॉस तैयार करने के लिए उन्होंने 50 से अधिक बार ट्रायल किए. इसके बाद कारोबार के लिए एक निश्चित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार की गई. इसमें स्विसबेक 00 फ्लोर का इस्तेमाल, 36 से 48 घंटे तक धीमी फर्मेंटेशन प्रक्रिया, हाथों से पिज्जा को आकार देना और 400 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर वुड-फायर्ड ओवन में बेक करना शामिल है. जून 2026 में स्थानीय माइक्रो-इन्फ्लुएंसर्स के साथ सहयोग के बाद NAPO को लोकप्रियता मिलने लगी.
मेन्यू में 8 तरह के पिज्जा, 390 से 520 रुपये तक कीमत
NAPO के मेन्यू में ग्राहकों के लिए छह वेज और दो नॉन-वेज पिज्जा उपलब्ध हैं. इसके अलावा पास्ता, चिकन विंग्स और इन-हाउस तैयार किए जाने वाले तिरमिसू जार जैसे डेजर्ट भी शामिल हैं. यहां पिज्जा की कीमत 390 रुपये से 520 रुपये के बीच रखी गई है. वहीं, एक ऑर्डर की औसत कीमत करीब 500 से 600 रुपये रहती है. अक्षिता का प्रयास है कि बेहतर क्वालिटी वाला नेपोलिटन पिज्जा केवल महंगे रेस्तरां तक सीमित न रहे, बल्कि आम ग्राहक भी इसका स्वाद ले सकें.
शेफ के नौकरी छोड़ने से लेकर बिलिंग धोखाधड़ी तक आईं चुनौतियां
बिजनेस की लोकप्रियता बढ़ने के साथ अक्षिता को कई परिचालन संबंधी समस्याओं से भी जूझना पड़ा. इस दौरान शेफ का अचानक नौकरी छोड़ देना, बिलिंग में धोखाधड़ी और गूगल रिव्यू से जुड़ी परेशानियां सामने आईं. हालांकि, इन चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कारोबार को आगे बढ़ाने पर ध्यान बनाए रखा. मई 2026 में जहां NAPO का रेवेन्यू 1.3 लाख रुपये और शुद्ध मुनाफा 30 हजार रुपये था, वहीं सितंबर 2026 तक मासिक रेवेन्यू बढ़कर 5.6 लाख रुपये हो गया. इस दौरान शुद्ध मुनाफा भी करीब 2.3 लाख रुपये तक पहुंच गया.
छह महीने में बेचे 3,500 से ज्यादा पिज्जा
अक्षिता के इस स्टार्टअप ने छह महीने के भीतर 3,500 से अधिक पिज्जा बेचने का आंकड़ा पार कर लिया है. फिलहाल यहां हर महीने औसतन 900 पिज्जा बिक रहे हैं. कारोबार की पीक डेली सेल्स 30 हजार से 40 हजार रुपये तक पहुंच जाती है. NAPO स्विगी और जोमैटो जैसे ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध है. हालांकि, अक्षिता ऑनलाइन ऑर्डर के साथ अपने आउटलेट पर आने वाले ग्राहकों के अनुभव को भी प्राथमिकता दे रही हैं. उनका लक्ष्य लखनऊ में NAPO को पिज्जा के एक स्थापित ब्रांड के रूप में पहचान दिलाना है.
लखनऊ में पिज्जा कल्चर को नई पहचान देने का लक्ष्य
अक्षिता गोयल के लिए यह सफर केवल नौकरी छोड़कर बिजनेस शुरू करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने उन्हें वित्तीय अनुशासन और कारोबार की बारीकियां भी सिखाईं. शुरुआती नुकसान से लेकर ऑपरेशन संबंधी चुनौतियों तक उन्होंने हर स्तर पर अपने बिजनेस को बेहतर बनाने की कोशिश की. अब उनका मुख्य लक्ष्य लखनऊ में NAPO को एक स्थापित नाम बनाना है. वह चाहती हैं कि इतालवी नेपोलिटन स्टाइल पिज्जा लोगों के लिए किसी खास अवसर का भोजन न रहकर रोजमर्रा की शाम का पसंदीदा स्ट्रीट फूड बने.