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करनाल की रसगुल्ला फैक्टरी पर फूड सेफ्टी विभाग का छापा:रसगुल्ले और गुलाब जामुन के सैंपल लिए,त्योहारी सीजन में रूटीन जांच के लिए पहुंची टीम, 14 दिन में आएगी लैब रिपोर्ट
त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने शनिवार को घरौंडा क्षेत्र के गांव बसी में रसगुल्ला बनाने वाली फैक्टरी पर छापा मारा। टीम ने फैक्टरी का निरीक्षण कर साफ-सफाई और खाद्य पदार्थ बनाने की प्रक्रिया की जांच की। इसके बाद रसगुल्ले और गुलाब जामुन के सैंपल लिए। इन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा कि सैंपल गुणवत्ता के मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं। फैक्टरी की साफ-सफाई भी जांची
खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. कपिला सैनी शनिवार को टीम के साथ गांव बसी पहुंचीं। यहां उन्होंने फैक्टरी का दौरा किया और वहां की साफ-सफाई यानी स्वच्छता व्यवस्था का जायजा लिया। इसके बाद टीम ने तैयार किए जा रहे रसगुल्ले और गुलाब जामुन के नमूने लिए।
डॉ. कपिला सैनी ने बताया कि इन दिनों त्योहारी सीजन चल रहा है। इसी के चलते रूटीन जांच अभियान के तहत फैक्टरी की जांच की गई है। लिए गए सभी सैंपल प्रयोगशाला में भेजे जाएंगे। वहां खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच होगी। करीब 14 दिन में रिपोर्ट आने की उम्मीद है। यदि किसी सैंपल में कमी पाई जाती है तो रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फैक्टरी संचालक बोले- पहले भी पास आए हैं सैंपल
फैक्टरी संचालक समे सिंह ने बताया कि खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम हर साल उनकी फैक्टरी में जांच के लिए आती है और सैंपल लेकर जाती है। कई बार सीएम फ्लाइंग की टीम भी फैक्टरी की जांच कर चुकी है। उनके अनुसार, अब तक कभी कोई सैंपल फेल नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि फैक्टरी में किसी भी तरह के गलत तरीके से खाद्य पदार्थ नहीं बनाए जाते और न ही रंग मिलाकर मिठाइयां तैयार की जाती हैं। वह खुद फैक्टरी में बनने वाले खाद्य पदार्थों की वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालते हैं, ताकि लोगों को भी जागरूक किया जा सके। खाने में केमिकल रंग की जगह फूलों का अर्क डालने की सलाह
समे सिंह ने लोगों से अपील की कि मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। यदि किसी खाद्य पदार्थ में रंग की जरूरत हो तो फूलों से तैयार अर्क का इस्तेमाल करना चाहिए। फिलहाल फैक्टरी से लिए गए सैंपलों की रिपोर्ट आने का इंतजार है। रिपोर्ट के आधार पर ही खाद्य सुरक्षा विभाग अगला कदम उठाएगा।