Saturday, 26 September 2026
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7 विदेशियों की रिहाई का आदेश आते ही लोगों को याद आया कंधार हाईजैक, वायरल हुई फोटो

INT News26 September 2026 at 08:43 pm

म्यांमार ट्रेनिंग कैंप मामले में तिहाड़ जेल में बंद 7 विदेशी नागरिकों को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष NIA कोर्ट ने अमेरिका के नागरिक मैथ्यू आरोन वैंडीके और 6 यूक्रेनी नागरिकों को एक महीने के लिए अपने परिवार से मिलने अमेरिका और यूक्रेन जाने की अनुमति दे दी है. कोर्ट ने साथ ही यह भी साफ कहा है कि इस दौरान उनको तय शर्तों और जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा. कोर्ट ने उनके पासपोर्ट भी वापस करने का आदेश भी संबंधित अथॉरिटीज को दिया है. इन सभी 7 विदेशियों को मामले में डिफॉल्ट जमानत पहले ही मिल चुकी है.

कोर्ट की ओर इन विदेशी नागरिकों की रिहाई के बाद सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है. सोशल मीडिया यूजर्स इसे कंधार हाईजैक यानी IC-814 विमान अपहरण कांड के बाद मसूद अजहर की रिहाई से जोड़ रहे हैं. सोशल मीडिया पर वायरल इस तस्वीर में ऊपर मसूद अजहर की रिहाई और नीचे अब यूक्रेन-अमेरिका के नागरिकों की तस्वीरें हैं. ऊपर-नीचे लगी तस्वीरों में तब इंटेलिजेंस ब्यूरो में रहे अब के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल का नाम दर्ज है.

गौरतलब है कि कंधार विमान अपहरण की घटना दिसंबर 1999 में हुई थी. वायरल तस्वीर में लिखा गया है कि कंधार हाईजैक के वक्त भी सरकार बीजेपी की थी और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के हेड थे अजीत डोभाल. उस समय आतंकी मसूद अजहर को रिलीज किया गया था. ठीक इसी के नीचे एक ताजा तस्वीर अटैच करते हुए लिखा गया कि साल 2026 में अमेरिकी और यूक्रेनी नागरिकों को रिलीज किया गया. अभी सरकारी बीजेपी की है. NSA अजीत डोभाल हैं.

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1999 का कंधार कांड आज भी उठाता है कई सवाल

तस्वीर शेयर करते हुए लिखा गया- 1999 में IC-814 विमान के अपहरण का अंत तीन आतंकियों की रिहाई के साथ हुआ था. इनमें मसूद अजहर भी शामिल था. उस समय यात्रियों को छुड़ाने के लिए भारत सरकार ने आतंकियों की मांग मानी थी. उस दौर के रिकॉर्ड और बाद की रिपोर्टों के मुताबिक, तत्कालीन इंटेलिजेंस ब्यूरो अधिकारी अजीत डोभाल भी बातचीत करने वाली टीम का हिस्सा थे और उन्होंने अपहरणकर्ताओं से बातचीत की थी. यह घटना आज भी चर्चा का विषय है. इसमें यह सवाल उठते हैं कि उस समय कौन से फैसले लिए गए, उन्हें लेने वाले कौन थे और आगे चलकर उनका क्या असर पड़ा. रिहा होने के बाद मसूद अजहर ने जैश-ए-मोहम्मद बनाया. इस संगठन का नाम कई बड़े आतंकी हमलों से जुड़ा, जिनमें 2019 का पुलवामा हमला भी शामिल है.