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हाईकोर्ट से JUIDCO को झटका, ईगल इंफ्रा इंडिया के बकाया भुगतान पर 60 दिन में आदेश लागू करने का निर्देश

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने हरमू नदी पुनर्जीवन परियोजना से जुड़े एक अहम मामले में झारखंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (JUIDCO) को बड़ा झटका दिया है. न्यायमूर्ति आनंद सेन की एकलपीठ ने ईगल इंफ्रा इंडिया लिमिटेड की याचिका स्वीकार करते हुए JUIDCO को 60 दिनों के भीतर कंपनी का लंबित भुगतान जारी करने का आदेश दिया है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा.
2015 में मिला था हरमू नदी परियोजना का ठेका
मामला हरमू नदी के पुनर्जीवन एवं संरक्षण परियोजना से जुड़ा है. ईगल इंफ्रा इंडिया लिमिटेड को वर्ष 2015 में इस परियोजना का ठेका मिला था. निर्माण कार्य 31 अक्टूबर 2018 तक पूरा कर लिया गया, जबकि इसके बाद पांच वर्षों का संचालन एवं रखरखाव (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) कार्य भी 31 अक्टूबर 2023 तक सफलतापूर्वक पूरा किया गया. कंपनी का आरोप था कि कार्य पूरा होने के बावजूद JUIDCO ने अंतिम रनिंग बिल (आरए बिल संख्या-29), ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस का बकाया, अतिरिक्त अवधि के कार्य का भुगतान और बैंक गारंटी जारी नहीं की.
JUIDCO ने कार्य पूरा होने की बात पहले स्वीकार की थी
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि JUIDCO ने 29 जनवरी 2024 के पत्र में स्वयं स्वीकार किया था कि परियोजना और पांच वर्ष का रखरखाव कार्य पूरा हो चुका है तथा अंतिम बिल जांच के अधीन है. इसके बावजूद कंपनी का भुगतान रोक दिया गया. दूसरी ओर JUIDCO ने दलील दी कि यह संविदा से जुड़ा धन वसूली का मामला है, इसलिए याचिकाकर्ता को मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) या सिविल कोर्ट का रुख करना चाहिए.
बैंक गारंटी लौटाने को अदालत ने माना अहम तथ्य
सुनवाई के दौरान JUIDCO के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि कंपनी की बैंक गारंटी सुनवाई के दौरान ही वापस कर दी गई है. हाईकोर्ट ने इसे महत्वपूर्ण मानते हुए कहा कि बिना किसी शर्त के बैंक गारंटी लौटाने का अर्थ है कि परियोजना का कार्य संतोषजनक ढंग से पूरा हुआ और ठेकेदार ने अपनी सभी संविदात्मक जिम्मेदारियां पूरी कर दीं. ऐसे में बाद में कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाना उचित नहीं है.
अनुच्छेद 226 के तहत सुनवाई योग्य माना मामला
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यदि सरकार या उसकी एजेंसी किसी ठेकेदार का स्वीकृत भुगतान बिना उचित कारण रोके रखती है तो अनुच्छेद 226 के तहत दायर रिट याचिका पूरी तरह सुनवाई योग्य है. अदालत ने कहा कि केवल यह तर्क देना कि मामला संविदा से जुड़ा है, भुगतान रोकने का वैध आधार नहीं हो सकता.
JUIDCO के जवाबों में मिले विरोधाभास
अदालत ने पाया कि JUIDCO ने कार्य की गुणवत्ता पर आपत्ति तो जताई, लेकिन उसके समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया. वहीं दूसरी ओर बैंक गारंटी वापस करने और परियोजना पूरी होने की स्वीकृति उसके अपने दावों के विपरीत थी. अदालत ने इसे JUIDCO के रुख में स्पष्ट विरोधाभास माना.
16 महीने के अतिरिक्त कार्य का भी मिलेगा भुगतान
हाईकोर्ट ने यह भी माना कि परियोजना का औपचारिक हस्तांतरण नहीं होने के कारण कंपनी को 31 अक्टूबर 2023 के बाद भी लगभग 16 महीने तक संचालन एवं रखरखाव का कार्य करना पड़ा. चूंकि JUIDCO इस तथ्य का प्रभावी ढंग से खंडन नहीं कर सका, इसलिए अदालत ने इस अतिरिक्त अवधि के भुगतान का भी कंपनी को अधिकार दिया.
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60 दिनों में भुगतान का आदेश
अंत में हाईकोर्ट ने JUIDCO को निर्देश दिया कि आरए बिल संख्या-29, ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस का पूरा बकाया तथा 1 नवंबर 2023 से याचिका दायर होने तक 16 महीने की अतिरिक्त अवधि का भुगतान 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित 60 दिनों के भीतर किया जाए. इसके साथ ही अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए सभी लंबित अंतरिम आवेदनों का भी निस्तारण कर दिया.
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