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रांची के मांडर में सज गया मेला का मैदान, 27 अक्टूबर से शुरू होगा मुड़मा जतरा

INT News26 October 2026 at 04:46 pm

मांडर: झारखंड के रांची जिले के मांडर में मुंडमा जतरा के लिए मेला मैदान पूरी तरह से सजकर तैयार हो गया है. ऐतिहासिक दो दिवसीय मुड़मा जतरा 27 अक्तूबर से शुरू होगा. जतरा के आयोजन की तैयारी पूरी हो चुकी है. जतरा में खेल तमाशे, बिजली चालित झूले, मौत का कुआं, सर्कस, झूला, जादू के खेल और मनोरंजन के कई अन्य साधन, पारम्परिक म्यूजिक सिस्टम, कृषि उपकरण, अस्त्र-शस्त्र, शृंगार प्रसाधन, खाने-पीने और खेल-खिलौनों की सैकड़ों दुकानें लगाई गई हैं. मेले में झारखंड के अलावा देश के विभिन्न राज्यों और नेपाल से भी लोगों के पहुंचने की उम्मीद है.

शक्ति खूंटा की पूजा के साथ होगी शुरुआत

मुड़मा जतरा की शुरुआत 27 अक्तूबर को दोपहर बाद पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान के साथ होगी. सरना धर्मगुरु बंधन तिग्गा की अगुवाई में 40 पड़हा के पाहन, पुजारी और धार्मिक अगुवा जतरा स्थल पर स्थित शक्ति खूंटा की पूजा-अर्चना करेंगे. इसके बाद मेले का विधिवत शुभारंभ होगा. आदिवासी समाज के लिए मुड़मा जतरा धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है. इस आयोजन में अलग-अलग पड़हा के लोगों की भागीदारी इसकी परंपरा को खास बनाती है.

चार सेक्टर में बांटा गया जतरा स्थल, ड्रोन से निगरानी

जतरा में उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये हैं. उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी और रांची के वरीय पुलिस अधीक्षक की ओर से संयुक्त आदेश जारी किया गया है. सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था की जिम्मेदारी ग्रामीण एसपी और सदर अनुमंडल पदाधिकारी संभालेंगे. जतरा स्थल को सुरक्षा की दृष्टि से चार बड़े सेक्टरों में बांटा गया है. प्रत्येक सेक्टर में पुलिस अधिकारियों के साथ पर्याप्त संख्या में पुरुष और महिला लाठी बल की तैनाती की जायेगी. भीड़ पर नजर रखने के लिए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल होगा.

21 गश्ती दल और विशेष नियंत्रण कक्ष तैनात

प्रशासन ने जतरा स्थल और आसपास के रास्तों पर लगातार निगरानी रखने के लिए 21 गश्ती दल तैनात किये हैं. ये दल मोटरसाइकिल और चार पहिया वाहनों से गश्त करेंगे. 26 अक्तूबर की दोपहर से जतरा की समाप्ति तक विशेष नियंत्रण कक्ष काम करेगा. यहां दंडाधिकारी और पुलिस अधिकारी तैनात रहेंगे, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके. पुलिस असामाजिक तत्वों, छेड़खानी करने वालों और अफवाह फैलाने वालों पर विशेष नजर रखेगी. प्रशासन का उद्देश्य जतरा में आने वाले श्रद्धालुओं और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.

समिति के 2000 स्वयंसेवक करेंगे सहयोग

राजी पड़हा जतरा समिति की ओर से भी प्रशासन को सहयोग देने के लिए दो हजार स्वयंसेवकों की तैनाती की जायेगी. ये स्वयंसेवक भीड़ प्रबंधन और आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं में मदद करेंगे. मुड़मा जतरा का एक प्रमुख आकर्षण समापन के दिन देखने को मिलता है. इस दौरान 40 पड़हा के लोग अपने पारंपरिक निशान, रम्पा-चम्पा, लकड़ी से बने हाथी, घोड़े, मगरमच्छ, मछली, कंडसा और झंडों के साथ नाचते-गाते जतरा में पहुंचते हैं. पारंपरिक वेशभूषा, वाद्य यंत्रों और सामूहिक भागीदारी से पूरा क्षेत्र आदिवासी संस्कृति के रंग में रंग जाता है.

27 और 28 अक्तूबर को NH-75 पर बदला रहेगा रूट

मुड़मा जतरा के दौरान यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग-75 पर 27 और 28 अक्तूबर को वाहनों का मार्ग बदला गया है. प्रशासन के अनुसार, लोहरदगा की ओर से रांची आने वाले वाहन टांगरबसली मोड़ से बेड़ो होते हुए रांची पहुंचेंगे. वहीं, रांची की ओर से आने वाले वाहनों को काठीटांड़ से ठाकुरगांव और बुढ़मू होते हुए उनके गंतव्य की ओर भेजा जायेगा. यात्रियों और वाहन चालकों को सलाह है कि यात्रा के दौरान निर्धारित वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करें और सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का पालन करें.

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आस्था, परंपरा और संस्कृति का अनूठा संगम

मुड़मा जतरा केवल मेला नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की परंपराओं, धार्मिक विश्वास और सामुदायिक एकता का महत्वपूर्ण आयोजन है. दो दिनों तक चलने वाले इस जतरा में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनोरंजन, पारंपरिक बाजार और सांस्कृतिक गतिविधियां देखने को मिलेंगी. प्रशासन, पुलिस और जतरा समिति ने भीड़ को देखते हुए व्यापक तैयारी की है.

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