Monday, 26 October 2026
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हरियाणा सरकार ने एचईआरसी को की मेल:कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के प्रवक्ता ने दी जानकारी, पेरेलल लाइसेंस रद्द करने को लिखा

INT News26 October 2026 at 05:45 pm

हरियाणा में बिजली सेक्टर में प्राइवेट कंपनी को पैरेलल लाइसेंस दिए जाने के फैसले को पब्लिक इंटरेस्ट में रद्द करने को लेकर हरियाणा सरकार की तरफ से संबंधित बॉडी HERC को मेल की गई है। इसको लेकर कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के प्रवक्ता रविंद्र घनघस ने से जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने मेल कर दी है और इसको लेकर अपील संबंधित प्राधिकरण के सामने संभवत कल जाएगी।

हड़ताल के दूसरे दिन जारी पत्र की रिकमेंडेशन को लेकर की मेल बिजली कर्मचारियों के साथ हड़ताल के दूसरे बैठक में सरकार और बिजली कर्मचारियों मे सहमति बनी। मीटिंग के तुरंत बाद सरकार ने एक पत्र जारी किया जिसमें लिखा था कि राज्य सरकार के राजस्व पर पड़ने वाले वित्तीय प्रभावों और उपभोक्ता हित तथा जनहित को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार नीतिगत रूप से तथा राज्य में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए, विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108 की उपधारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, आयोग को निर्देश देती है कि वह हरियाणा राज्य में कहीं भी समानांतर वितरण लाइसेंस सृजित, संचालित या प्रभावी न करे। आगे पत्र में लिखा था कि ये निर्देश हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री की स्वीकृति से जारी किए गए हैं और धारा 108 के अंतर्गत राज्य सरकार के इन निर्देशों को आयोग के संज्ञान में लाएं। कर्मचारियों के कड़े विरोध के चलते लेना पड़ा फैसला बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के दूसरे ही दिन सरकार बैकफुट पर आ गई और सरकार ने कर्मचारियों को मीटिंग के लिए बुलाकर इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 108 का इस्तेमाल पर प्राइवेट कंपनी के पेरेलल लाइसेंस को रद्द करने और इसको लेकर लेकर एचईआरसी को लिखने पर सहमति जताई जिसके बाद कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल समाप्त कर दी। वहीं कर्मचारियों की तरफ से दावा किया गया था कि करीब 50 हजार कर्मचारी हड़ताल पर थे। शुरुआत में धारा 108 पर नहीं बनी थी सहमति शुरुआत से ही कर्मचारी लगातार मांग कर रहे थे कि सरकार संबंधित एक्ट की धारा 108 के तहत अपनी प्रदश शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए पेरेलल लाइसेंस को रद्द कर सकती है और सरकार ये तुरंत करना चाहिए लेकिन तब इसको लेकर सहमति नहीं बनी लेकिन जब विरोध बढ़ गया तो सरकार को बात मानना पड़ी।