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चरखी दादरी में भ्रूण लिंग जांच करने वाले एक्सपोज:सोनीपत हेल्थ विभाग की रेड; 1 लाख में सौदा तय, फोन पर बताया- 'बहुत अच्छी खबर, लड़का है'
सोनीपत स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सिविल सर्जन डॉ. अनुराधा जैन के नेतृत्व में अंतर-जिला कार्रवाई करते हुए चरखी दादरी में कथित भ्रूण लिंग जांच के मामले का खुलासा किया है। पीसी-पीएनडीटी एक्ट के तहत की गई इस कार्रवाई में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तीन आरोपियों को पकड़ा। विभाग के अनुसार, कथित तौर पर लिंग जांच के लिए गर्भवती महिला से 1.20 लाख रुपये की मांग की गई थी, जिसके बाद सौदा एक लाख रुपये में तय हुआ। जांच के दौरान सामने आया कि कथित रैकेट में एक BAMS डॉक्टर (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी) के साथ निजी अस्पताल का एक्स-रे तकनीशियन भी शामिल था। विभाग की कार्रवाई के बाद सिटी चरखी दादरी थाना में एफआईआर दर्ज कराई गई है। सिविल सर्जन के नेतृत्व में इंटर-जिला रेड स्वास्थ्य विभाग की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, सिविल सर्जन सोनीपत डॉ. अनुराधा जैन की अध्यक्षता में सोनीपत की टीम ने चरखी दादरी में अंतर-जिला रेड की। कार्रवाई में डॉ. दीपक कौशिक, नोडल अधिकारी पीसी-पीएनडीटी सोनीपत, डॉ. योगेश दहिया, नोडल अधिकारी पीसी-पीएनडीटी सोनीपत और डॉ. दीपक शर्मा, एमओ सोनीपत शामिल रहे। चरखी दादरी स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भी रेड में सहयोग किया। BAMS डॉक्टर पर लिंग जांच कराने का आरोप स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, इस मामले में डॉ. विभूति वत्स, जो BAMS डॉक्टर बताई गई हैं, की भूमिका सामने आई है। आरोप है कि वह प्रधान अस्पताल में काम कर रही थीं और वहां के एक्स-रे तकनीशियन रविंद्र की मदद से कथित तौर पर भ्रूण के लिंग की जांच कराने का काम कर रही थीं। रजिस्टर्ड सेंटर पर कराया गया अल्ट्रासाउंड विभाग के अनुसार, कथित लिंग जांच के लिए गर्भवती महिला का अल्ट्रासाउंड सुविधा मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल स्थित पंजीकृत केंद्र पर कराया गया। इसके लिए रेफरल स्लिप और फॉर्म-एफ की प्रक्रिया पूरी की गई थी। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच के दौरान एएनसी रजिस्टर का रखरखाव नहीं होने की बात भी सामने रखी। 1.20 लाख की मांग, एक लाख में हुआ सौदा जांच के दौरान सामने आई जानकारी के अनुसार, कथित तौर पर भ्रूण का लिंग बताने के लिए डॉ. विभूति की ओर से 1.20 लाख रुपये की मांग की गई थी। बाद में बातचीत के बाद यह रकम एक लाख रुपये में तय होने का आरोप है।
पहले ऑनलाइन लिए 40 हजार रुपये स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, तय रकम में से 40 हजार रुपये एडवांस के तौर पर ऑनलाइन लिए गए। यह रकम कथित तौर पर डॉ. विभूति के किसी परिचित के फोन-पे अकाउंट में ट्रांसफर कराई गई। इसके बाद बाकी 60 हजार रुपये अल्ट्रासाउंड होने के बाद दिए जाने की बात सामने आई है। फोन पर बताया- ‘बहुत अच्छी खबर, लड़का है’ विभाग के अनुसार, अल्ट्रासाउंड के बाद डॉ. विभूति वत्स ने फोन पर कथित तौर पर भ्रूण का लिंग बताते हुए "वेरी गुड न्यूज, बॉय" कहा। यानी गर्भ में लड़का होने की जानकारी दिए जाने का आरोप है। कार्रवाई के दौरान विभाग की टीम ने कथित तौर पर लेन-देन से संबंधित रकम भी बरामद की। तीन आरोपी पकड़े, पुलिस ने दर्ज की FIR इस कार्रवाई में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तीन आरोपियों को पकड़ा। मामले में चरखी दादरी पुलिस को शिकायत दी गई, जिसके बाद सिटी चरखी दादरी थाना में एफआईआर दर्ज की गई है। अब पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कथित तौर पर इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल थे। स्वास्थ्य विभाग की यह कार्रवाई पीसी-पीएनडीटी (Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques) Act के तहत की गई है। भ्रूण के लिंग की जांच और इसकी जानकारी देना कानूनन प्रतिबंधित है। विभाग अब मामले से जुड़े दस्तावेजों, पैसों के लेन-देन और आरोपियों की भूमिका की जांच कर रहा है।