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ग्वालियर में दुष्कर्म और पॉक्सो केस में युवक बरी:अदालत में बालिग साबित हुई युवती, जांच में युवक का डीएनए नहीं मिला
ग्वालियर की विशेष पॉक्सो अदालत ने दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट से जुड़े एक मामले में शताब्दीपुरम निवासी विवेक भदौरिया को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। विशेष न्यायाधीश वंदना राज पांडेय की अदालत ने उम्र से जुड़े दस्तावेजों, गवाहों के बयानों और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर विचार करने के बाद बुधवार को यह फैसला सुनाया। महाराजपुरा थाने में दर्ज मामले में युवती ने विवेक पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने, बाद में शादी से इनकार करने और मारपीट करने के आरोप लगाए थे। हालांकि, अदालत में सुनवाई के दौरान युवती की उम्र और आरोपों से जुड़े साक्ष्य अहम रहे। स्कूल के प्रमाण पत्र में उम्र दो साल कम दर्ज सुनवाई के दौरान युवती और उसकी मां के बयानों के आधार पर उसकी जन्मतिथि को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक युवती की वास्तविक जन्मतिथि वर्ष 2005 बताई गई, जबकि स्कूल में दाखिले के लिए वर्ष 2021 में बने प्रमाण पत्र में उसकी उम्र दो साल कम दर्ज कराई गई थी। अदालत ने युवती को घटना के समय बालिग माना और पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों को लागू नहीं पाया। डीएनए जांच में नहीं मिला पुरुष डीएनए मामले में राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला की डीएनए जांच रिपोर्ट भी सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, युवती के नमूनों में पुरुष डीएनए की मौजूदगी नहीं मिली। सुनवाई के दौरान युवती और उसकी मां के बयानों में भी प्रेम संबंध और शादी को लेकर विवाद की बात सामने आई। बचाव पक्ष के अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया के मुताबिक, मोबाइल चैट और फोरेंसिक जांच से जुड़े साक्ष्य भी अदालत में पेश किए गए। उन्होंने कहा कि युवती के अन्य युवकों से चैट मिलने के बाद शादी को लेकर विवाद हुआ था और इसके बाद शिकायत दर्ज कराई गई। बचाव पक्ष के तर्कों पर अदालत ने किया विचार बचाव पक्ष ने मामले में लगाए गए आरोपों को गलत बताते हुए युवती की उम्र, डीएनए रिपोर्ट और मोबाइल की फोरेंसिक जांच को आधार बनाया। अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद विवेक भदौरिया को सभी आरोपों से बरी कर दिया।