Monday, 17 August 2026
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बालोद के आत्मानंद स्कूल में समिति ने रखे प्राइवेट टीचर:वेतन देने बच्चों से मांगे 400-400 रुपए, 2.19 लाख जुटाने पर पेरेंट्स ने मांगा हिसाब

INT News17 August 2026 at 03:38 pm

बालोद जिले के डौंडीलोहारा ब्लॉक के अछोली गांव के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम स्कूल में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए अपनाई गई व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। करीब तीन साल से अंग्रेजी और राजनीति विज्ञान के शिक्षक नहीं होने के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। इसे देखते हुए शाला प्रबंधन समिति ने अपने स्तर पर दो निजी शिक्षक रखे हैं। इनके मानदेय के लिए स्कूल के 548 विद्यार्थियों से सालाना 400-400 रुपए लिए जा रहे हैं। इससे करीब 2.19 लाख रुपए जुटाए जाने हैं। पालकों का विरोध इसी व्यवस्था और राशि के उपयोग को लेकर है।

3 साल से खाली पद, समिति ने रखे निजी शिक्षक पालकों के अनुसार, स्कूल में अंग्रेजी और राजनीति विज्ञान विषय के शिक्षकों की कमी करीब तीन साल से है। नियमित शिक्षकों की व्यवस्था के लिए कई बार मांग की गई, लेकिन नियुक्ति नहीं हो सकी। पढ़ाई प्रभावित होने लगी तो शाला प्रबंधन समिति ने अपने स्तर पर दो निजी शिक्षकों को रखने का फैसला किया। समिति का कहना है कि शासन की ओर से नियमित शिक्षक मिलने तक बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए यह अस्थायी व्यवस्था की गई है। 400 रुपए सालाना देने का पालक कर रहे विरोध निजी शिक्षकों का मानदेय जुटाने के लिए प्रत्येक विद्यार्थी से 400 रुपए लिए जा रहे हैं। पालकों का कहना है कि सरकारी स्कूल में शिक्षकों की नियुक्ति और वेतन की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की है। ऐसे में बच्चों से पैसा लेकर निजी शिक्षक रखने की व्यवस्था उचित नहीं है। कुछ पालकों ने राशि लिए जाने के बावजूद रसीद नहीं मिलने की शिकायत भी की है। उन्होंने पूरी राशि के हिसाब और उसके इस्तेमाल की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। 548 बच्चों से 2.19 लाख, शिक्षकों पर खर्च होंगे 1.20 लाख समिति के अनुसार दोनों निजी शिक्षकों को 6-6 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है। 10 महीने में दोनों शिक्षकों पर कुल 1.20 लाख रुपए खर्च होंगे। दूसरी ओर, 548 विद्यार्थियों से 400-400 रुपए लेने पर करीब 2.19 लाख रुपए जमा होंगे। यानी शिक्षकों के मानदेय के बाद करीब 99 हजार रुपए अतिरिक्त बचेंगे। यही अंतर अब पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल बन गया है। पालक पूछ रहे हैं कि जब मानदेय पर 1.20 लाख रुपए खर्च होने हैं, तो विद्यार्थियों से 2.19 लाख रुपए क्यों लिए जा रहे हैं और करीब 99 हजार रुपए की शेष राशि किस मद में खर्च होगी। समिति बोली- सरकारी शिक्षक आते ही व्यवस्था खत्म शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष रामेश्वर सिंह बालेंद्रे ने निजी शिक्षक रखने और विद्यार्थियों से 400 रुपए लिए जाने की बात स्वीकार की। उन्होंने कहा कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए ग्रामीणों और पालकों की सहमति से यह व्यवस्था की गई है। उनके मुताबिक, दोनों शिक्षकों को 6-6 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है। शासन से नियमित शिक्षक मिलते ही निजी शिक्षकों को हटा दिया जाएगा। DEO बोले- जानकारी मिली है, जांच के बाद होगी कार्रवाई प्रभारी प्राचार्य विजय कुमार गावरे ने बताया कि शिक्षकों की कमी की जानकारी उच्च कार्यालयों को दी गई है। पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए समिति ने दो शिक्षकों की व्यवस्था की है। जिला शिक्षा अधिकारी दीपक दुबे ने कहा कि समिति द्वारा अपने स्तर पर शिक्षक रखकर विद्यार्थियों से मानदेय के लिए राशि लिए जाने की जानकारी मिली है। मामले की पूरी जानकारी लेकर जांच की जाएगी। इसके बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।