Wednesday, 15 July 2026
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बेमेतरा के पथर्रा में प्रदेश की पहली ओपन जेल:10.20 हेक्टेयर में बनेगी, 13 साल सजा काट चुके चुनिंदा 200 कैदियों को रखा जाएगा

INT News15 July 2026 at 03:44 pm

छत्तीसगढ़ को पहली बार ओपन जेल मिलने जा रही है। सरकार ने बेमेतरा जिले के पथर्रा गांव में 200 कैदियों की क्षमता वाली ओपन जेल शुरू करने का आदेश जारी कर दिया है। ये जेल 10.20 हेक्टेयर लैंड एरिया में होगी। शुरुआत में 13 साल से अधिक सजा काट रहे कैदियों को मौका मिलेगा। यहां अच्छे आचरण वाले कैदियों को चारदीवारी में बंद रखने के बजाय सीमित निगरानी में रहने, काम करने और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का मौका मिलेगा। कैदियों को 16 से अधिक रोजगार में परिपक्व बनाया जाएगा। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य सिर्फ सजा देना नहीं, बल्कि कैदियों का सुधार, पुनर्वास और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। समझिए, ओपन जेल क्या होती है ओपन जेल ऐसी जेल होती है, जहां कैदियों को ऊंची दीवारों और कड़ी सुरक्षा में बंद नहीं रखा जाता। यहां अच्छे आचरण वाले कैदियों को सीमित निगरानी में रहने और काम करने का मौका मिलता है। उन्हें दिन में खेती, डेयरी, छोटे उद्योग या दूसरे काम करने की अनुमति होगी। हालांकि उन्हें जेल के नियमों का पालन करना होगा और तय समय पर वापस लौटना होगा। आजीवन कारावास काट रहे कैदियों को रखा जाएगा ओपन जेल में शुरुआत में सिर्फ ऐसे कैदियों को रखा जाएगा— जेल के बाहर भी काम कर सकेंगे कैदियों को जोखिम रहित उद्योगों, खेतों और दूसरे वैध कामों में काम करने की अनुमति होगी। बेमेतरा-सिमगा रोड पर आस्था कैफे और ग्रॉसरी शॉप भी चलाई जाएगी, जहां कैदी काम करेंगे। जेल के बाहर बने एंपोरियम में कैदियों द्वारा तैयार सामान की बिक्री भी होगी। जेल DG की अध्यक्षता में चुने जाएंगे कैदी जेल डीजी हिमांशु गुप्ता ने बताया कि ओपन जेल में 200 कैदियों को रखा जाएगा। सबसे पहले अलग-अलग जेलों के जेल अधीक्षक पात्र कैदियों का चयन कर उनकी फाइलें भेजेंगे। इसके बाद डीजी जेल की अध्यक्षता वाली समिति सभी मामलों की जांच करेगी और अंतिम फैसला लेगी कि किन कैदियों को ओपन जेल में भेजा जाएगा। शुरुआत में ऐसे कैदियों को प्राथमिकता मिलेगी, जो आजीवन कारावास की सजा के दौरान 13 साल या उससे अधिक समय जेल में बिता चुके हैं, जिनका आचरण अच्छा रहा है और जो ओपन जेल के तय नियमों पर खरे उतरते हैं। रिहाई के बाद भी मिलेगी मदद जेल विभाग ने इंडियन ओवरसीज बैंक के साथ एमओयू किया है। इसके तहत रिहाई के बाद स्वरोजगार शुरू करने के लिए पात्र कैदियों को बैंक से लोन लेने में मदद मिलेगी।