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बीआईटी सिंदरी के पूर्व छात्र ने रचा इतिहास, इसरो के इस बड़े सैटेलाइट मिशन की संभाली कमान

धनबाद. बिहार के दरभंगा जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के महत्वपूर्ण मिशन का नेतृत्व कर रहे बीआईटी सिंदरी के पूर्व छात्र डॉ इम्तियाज अहमद आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन गये हैं. दरभंगा जिले के जाले प्रखंड स्थित रेवढ़ा गांव निवासी डॉ अहमद वर्तमान में इसरो के जियो-इमेजिंग सैटेलाइट मिशन EOS-05 के प्रोजेक्ट डायरेक्टर हैं. उनकी इस उपलब्धि से बीआईटी सिंदरी में हर्ष और गर्व का माहौल है.
EOS-05 मिशन की सफलता में निभायी अहम भूमिका
इसरो के EOS-05 जियो-इमेजिंग सैटेलाइट मिशन का चार सितंबर 2026 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F17 रॉकेट के माध्यम से सफल प्रक्षेपण किया गया. इस महत्वपूर्ण मिशन के प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में डॉ इम्तियाज अहमद ने अहम जिम्मेदारी निभायी. मिशन की सफलता के बाद उनके योगदान की व्यापक सराहना हो रही है.
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रेवढ़ा गांव से इसरो तक का सफर
पूर्व सैनिक मो कमर आलम के पुत्र डॉ अहमद ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रेवढ़ा मध्य विद्यालय और दरभंगा जिला स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने पटना साइंस कॉलेज से आईएससी की पढ़ाई पूरी की. उच्च तकनीकी शिक्षा के लिए उन्होंने बीआईटी सिंदरी में प्रवेश लिया और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की.
वर्ष 1998 में इसरो से जुड़ने के बाद उन्होंने लगातार कई महत्वपूर्ण अंतरिक्ष परियोजनाओं में योगदान दिया. अपने लंबे करियर के दौरान वह INSAT-3DS, GSAT-20 और GSAT-2 समेत कई प्रमुख मिशनों से जुड़े रहे हैं.
सफलता का श्रेय शिक्षकों को दिया
डॉ इम्तियाज अहमद ने अपनी सफलता का श्रेय बीआईटी सिंदरी के पूर्व निदेशक और वर्तमान में झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जेयूटी), रांची के कुलपति डॉ डीके सिंह को दिया है. उन्होंने कहा कि शिक्षकों के मार्गदर्शन और संस्थान में मिली तकनीकी शिक्षा ने उनके करियर को मजबूत आधार प्रदान किया.
बीआईटी परिवार ने जताया गर्व
बीआईटी सिंदरी के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के प्रो. डॉ राजीव रंजन ने कहा कि डॉ अहमद की उपलब्धि पूरे बीआईटी परिवार के लिए गौरव का विषय है. संस्थान के निदेशक प्रो. पंकज राय, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ शिक्षकों और पूर्व छात्रों ने भी उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की.
डॉ इम्तियाज अहमद की सफलता यह साबित करती है कि ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थी भी मेहनत, लगन और तकनीकी दक्षता के बल पर देश के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा सकते हैं.
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