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500 रुपये का शुल्क हुआ 5,000, 7,100 घर हुए 4,656; रांची की स्लम योजना पर जांच में उठे सवाल

रांची. रांची नगर निगम की स्लम विकास योजना में घरों की संख्या घटाने और निबंधन शुल्क बढ़ाने को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं. योजना के शुरुआती प्रस्ताव में 7,100 घर बनाने की बात थी, लेकिन बाद में यह संख्या घटाकर 4,656 कर दी गयी. इसी तरह लाभुकों के लिए निबंधन शुल्क 500 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दिया गया.
निबंधन शुल्क में दस गुना बढ़ोतरी
नगर निगम की वर्ष 2026 में हुई जांच में यह स्पष्ट करने वाला दस्तावेज नहीं मिला कि योजना में प्रस्तावित घरों की संख्या क्यों घटायी गयी और निबंधन शुल्क में दस गुना बढ़ोतरी किस आधार पर की गयी. जांच टीम ने योजना की शर्तों को लेकर भी सवाल उठाये.
15,926 परिवारों को आवास देने का था लक्ष्य
योजना के तहत राजधानी की 95 मलिन बस्तियों के 15,926 परिवारों के जीवन स्तर में सुधार के लिए आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था. ये आवास प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत बनाये जाने थे.
लाभुकों को देना था लागत का 76 प्रतिशत हिस्सा
वर्ष 2021 के प्रस्ताव के अनुसार जनवरी 2021 में एचईसी, धुर्वा के आनी गांव और भूसुर में 7,100 घर बनाने की योजना थी. प्रस्ताव के मुताबिक इच्छुक लोगों को 500 रुपये का निबंधन शुल्क देकर योजना में शामिल होने का मौका दिया जाना था. योजना में सरकार की ओर से आवास निर्माण के लिए सहायता दी जानी थी, जबकि लाभुकों को निर्माण लागत का 76 प्रतिशत हिस्सा देना था.
7,100 से घटकर 4,656 हुए आवास
योजना शुरू होने के बाद इसकी शर्तों में बदलाव किया गया. प्रस्तावित 7,100 आवासों की संख्या घटाकर 4,656 कर दी गयी. साथ ही निबंधन शुल्क 500 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दिया गया.
बदलावों के कारणों को स्पष्ट करने वाले दस्तावेज नहीं
नगर निगम की जांच के दौरान इन बदलावों के कारणों को स्पष्ट करने वाले दस्तावेज नहीं मिलने से योजना की प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं. जांच टीम ने माना कि लाभुकों के लिए तय आर्थिक शर्तें भी व्यावहारिक नहीं थीं.
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8.92 लाख रुपये तक पहुंच गया लाभुकों का हिस्सा
जांच में सामने आया कि निर्माण लागत का 76 प्रतिशत हिस्सा लाभुकों को देना था. यह राशि करीब 8.92 लाख रुपये तक पहुंच रही थी. इतनी बड़ी राशि जुटाना गरीब परिवारों के लिए मुश्किल था. इसके अलावा 5,000 रुपये के निबंधन शुल्क ने भी योजना में लोगों की भागीदारी को प्रभावित किया.
सिर्फ 85 ने कराया निबंधन
योजना की शर्तों में बदलाव का असर निबंधन पर भी पड़ा. शुरुआत में 4,335 लोग निर्माण लागत में अपना हिस्सा देने के लिए तैयार थे. लेकिन शर्तों में बदलाव और निबंधन शुल्क बढ़ने के बाद सिर्फ 85 लोगों ने 5,000 रुपये जमा कर निबंधन कराया.
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गरीब परिवारों की भागीदारी काफी कम
इस तरह योजना में प्रस्तावित आवासों की संख्या घटने, निबंधन शुल्क बढ़ने और लाभुकों पर बड़ी राशि का भार पड़ने से गरीब परिवारों की भागीदारी काफी कम हो गयी. अब जांच में यह सवाल महत्वपूर्ण है कि योजना की मूल शर्तों में बदलाव किस आधार पर किया गया और इसके पीछे जिम्मेदारी किसकी थी.