Wednesday, 28 October 2026
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दंतेवाड़ा में पैंगोलिन की खाल के साथ पकड़ाए 6 तस्कर:इससे सेक्स पावर बढ़ाने की दवा बनाने की अफवाह, इंटरनेशनल मार्केट तक तस्करी, जांच जारी

INT News28 October 2026 at 06:44 pm

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में पैंगोलिन की तस्करी के मामले में वन विभाग ने 6 तस्करों को पकड़ा है। इनके कब्जे से करीब 14 किलो पैंगोलिन की खाल और शल्क बरामद किए गए हैं। दावा है कि करीब 6 से 7 पैंगोलिन का शिकार करने के बाद खाल जुटाई गई है। अफवाह है कि पैंगोलिन की खाल से सेक्स पावर बढ़ाने की दवा बनाई जाती है। इसकी कीमत लाखों में है। इंटरनेशनल मार्केट में इसकी डिमांड भी ज्यादा है। वहीं इसी अफवाह के चलते इस दुर्लभ वन्यजीव का शिकार किया जाता है। मामला गीदम थाना क्षेत्र का है। ऐसे पकड़ाए तस्कर वन विभाग को मुखबिर से सूचना मिली थी कि गीदम वन परिक्षेत्र में अलग-अलग वाहनों में कुछ लोग पैंगोलिन की खाल लेकर घूम रहे हैं। वे इसे बेचने के लिए ग्राहक की तलाश कर रहे हैं। सूचना के बाद वन विभाग की टीम बनाई गई। टीम ने गीदम पुलिस थाना के पास से 3 लोगों को पकड़ा। जिसके बाद टीम को पता चला की जावंगा के पास भी कुछ और लोग हैं, जहां टीम ने दबिश दी और अन्य 3 लोगों को हिरासत में लिया गया। वाहनों की तलाशी के दौरान एक गाड़ी में टायर की स्टेपनी के पास रखी बोरी से पैंगोलिन की खाल और शल्क बरामद किए गए। जब्त सामग्री का कुल वजन करीब 14 किलो बताया जा रहा है। दंतेवाड़ा का एक आरोपी, अन्य बीजापुर के रहने वाले इस मामले में वन विभाग की टीम के शुरूआती जांच में पकड़े गए आरोपियों के नाम लक्ष्मण तेलाम, दीपक, मासा मूर्ति, हेमंत वासम, कुहरम भीमा और मासाराम मंडावी बताए गए हैं। इनमें लक्ष्मण तेलाम दंतेवाड़ा जिले का रहने वाला है, जबकि अन्य आरोपी बीजापुर जिले के निवासी बताए जा रहे हैं। वन विभाग की मानें तो लक्ष्मण तेलाम पहले भी बाघ की खाल की तस्करी के मामले में जेल जा चुका है। 6 से 7 पैंगोलिन के शिकार की आशंका इनके पास से लगभग 14 किलो खाल बरामद हुई है। दावा किया जा रहा है कि इसे 6 से 7 पैंगोलिन का शिकार करने के बाद जुटाया गया था। एक वयस्क पैंगोलिन से करीब 2 से ढाई किलो खाल निकलती है। वन विभाग की टीम यह पता लगाने में जुटी है कि इन वन्यजीवों का शिकार कहां किया गया और आरोपी इसे किसे बेचने वाले थे। क्या होता है पैंगोलिन? पैंगोलिन एक दुर्लभ स्तनधारी वन्यजीव है। इसके शरीर पर कठोर शल्क होते हैं, जिन्हें अंग्रेजी में स्केल कहा जाता है। ये केराटिन नामक प्रोटीन से बने होते हैं, वही प्रोटीन जिससे इंसानों के बाल और नाखून बनते हैं। खतरा महसूस होने पर यह अपने शरीर को गोल आकार में समेट लेता है। पैंगोलिन मुख्य रूप से चींटियां और दीमक खाता है। जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र में इसकी अहम भूमिका है। इसके शल्कों का इस्तेमाल कुछ पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में किए जाने के दावे हैं, लेकिन इनके जरिए सेक्स पावर बढ़ने का कोई विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पैंगोलिन के शल्कों की मांग के कारण इसकी तस्करी के मामले सामने आते रहे हैं। तस्करी पर 7 साल तक की जेल का प्रावधान पैंगोलिन और उसके अंगों का अवैध शिकार, कब्जा और व्यापार वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत दंडनीय। कानूनी प्रावधानों के अनुसार दोषी पाए जाने पर 3 से 7 साल तक की जेल और कम से कम 25 हजार रुपए जुर्माने का प्रावधान है। दोबारा अपराध करने पर न्यूनतम जुर्माना 1 लाख रुपए हो सकता है। DFO रंगनाधा राधाकृष्णा वाय और SDO शिवेंद्र सिंह के निर्देश पर एक टीम बनाई गई थी। इस टीम में गीदम रेंजर शिव टंडन, बचेली रेंजर डॉ प्रीतेश पांडेय, डिप्टी रेंजर के. राजू, बीट गार्ड लक्ष्मी प्रसाद चालकी समेत अन्य अधिकारी और कर्मचारियों ने कर्रवाई की है।