Wednesday, 4 November 2026
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मनीषा डेथ मिस्ट्री, पिता बोले- निष्पक्ष जांच हो:बेटी के लिए आखिरी तक लड़ाई लड़ेंगे, परिवार व संगठनों की बैठक हुई

INT News4 November 2026 at 05:50 pm

भिवानी के गांव ढाणी लक्ष्मण निवासी मनीषा मौत मामले को लेकर भिवानी के सिटी स्टेशन के नजदीक स्वामी धर्मशाला में सामाजिक संगठनो एवं परिवार के सदस्यों की बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें मनीषा के पिता संजय व किसान नेता सुरेश कोथ ने बताया कि इस संघर्ष के दौरान कई लोगों ने लगातार उनका साथ दिया। वहीं कानूनी लड़ाई में अधिवक्ता ने मजबूती से पैरवी की। उनकी पैरवी के चलते अदालत में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती दी गई और अदालत ने रिपोर्ट को स्वीकार करने के बजाय दोबारा जांच के आदेश दिए। परिवार का कहना है कि सीबीआई की रिपोर्ट में उन सवालों के जवाब नहीं मिले, जिनकी सच्चाई सामने लाने की वे लगातार मांग कर रहे थे। पंचकूला कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए दोबारा जांच के आदेश दिए गए हैं। परिवार ने इस फैसले को न्याय की लड़ाई में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि सीबीआई की जांच में कई अहम तथ्यों और गवाहों को शामिल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि करीब सवा साल से इस मामले को लेकर परिवार संघर्ष कर रहा है। उन्हें सामाजिक और कानूनी सहयोग नहीं मिलता तो न्याय की लड़ाई और लंबी हो सकती थी। अखिरी कॉल डिटेल व मोबाइल लोकेशन को लेकर सवाल उठाए

परिवार ने बेटी की आखिरी कॉल डिटेल और मोबाइल लोकेशन को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना है कि मोबाइल की अंतिम लोकेशन और फोन बंद होने के स्थान की स्पष्ट जानकारी जांच में सामने नहीं लाई। रात 12 बजे हुई कॉल की लोकेशन भी जांच में स्पष्ट नहीं की गई। पिता संजय के अनुसार, इन महत्वपूर्ण तथ्यों और गवाहों को जांच में समुचित रूप से शामिल नहीं किया गया। हरियाणा पुलिस की जांच पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारियों ने करीब 40 दिन तक सीसीटीवी फुटेज अपने पास रखी और उसे आगे जांच के लिए नहीं भेजा। उनका कहना है कि सीसीटीवी फुटेज में कई महत्वपूर्ण तथ्य हो सकते हैं। कॉलेज की डीवीआर फुटेज में भी कथित कटिंग की बात सामने आई है, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। परिवार ने मांग की कि फुटेज को अपने पास रखने वाले संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाए। सुसाइड नोट की लिखावट का नहीं हुआ मिलान

संजय कुमार ने कहा कि सुसाइड नोट की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि अदालत में लिखावट के मिलान से संबंधित पहलू सामने आया, जिसमें कथित सुसाइड नोट की लिखावट का मिलान नहीं हुआ। परिवार के अनुसार, अदालत ने लिखावट की दो अलग-अलग स्थानों से जांच करवाने के निर्देश दिए हैं। परिवार का दावा है कि सुसाइड नोट की वास्तविकता की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। परिवार ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिपोर्ट के अनुसार बेटी की मौत करीब 36 घंटे पहले हुई थी। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि उन 36 घंटों के दौरान बेटी कहां रही और उसके साथ क्या हुआ? परिवार का कहना है कि वे घटनास्थल और आसपास के रास्तों का निरीक्षण कर चुके हैं। वहां हर 5 मिनट में कोई न कोई वाहन गुजरता है। ऐसे में इतने लंबे समय तक किसी की नजर उस पर क्यों नहीं पड़ी, इसकी जांच होनी चाहिए।