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Coal Mine Shutdown: ‘जमीन हमारी, विस्थापन हमारा, नौकरी बाहरी को’, भुरकुंडा खदान में आंदोलन तेज

भुरकुंडा (रामगढ़). मांगों पर पहल नहीं होने से नाराज भुरकुंडा रैयत विस्थापित मोर्चा के बैनर तले लोगों ने बुधवार को भुरकुंडा परियोजना में कार्यरत बीएलए आउटसोर्सिंग कंपनी की संगम खदान में कामकाज पूरी तरह बंद करा दिया. आंदोलन के कारण खदान में कोयला और ओबी का उत्पादन के साथ-साथ ट्रांसपोर्टिंग भी ठप हो गयी. बंद समर्थक झंडे और बैनर लेकर ट्रांसपोर्टिंग मार्ग पर जमा रहे. इसके कारण खदान से कोयला और ओबी की ढुलाई भी प्रभावित हुई.
इन मांगों को लेकर आंदोलन
मोर्चा नेताओं के अनुसार, पूर्व में प्रबंधन को मांग पत्र सौंपा गया था. इसमें भुरकुंडा रोड सेल शुरू करने, विस्थापितों और प्रभावित परिवारों को 75 प्रतिशत रोजगार देने, ट्रांसपोर्टिंग का काम विस्थापितों को देने और पुनर्वास स्थलों पर मूलभूत सुविधाएं बहाल करने की मांग प्रमुख थी.
मोर्चा का आरोप है कि मांग पत्र सौंपे जाने के बावजूद प्रबंधन की ओर से किसी भी मांग को पूरा करने की दिशा में पहल नहीं की गयी. इसी के विरोध में खदान में काम बंद कराया गया.
'जमीन हमारी, विस्थापन हमारा, नौकरी बाहरी को'
मोर्चा के कोषाध्यक्ष रंजीत बेसरा ने कहा कि कंपनी की मनमानी नहीं चलने दी जायेगी. उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन स्थानीय लोगों की गयी, विस्थापन भी उनका हुआ, लेकिन रोजगार बाहरी लोगों को दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि सीसीएल प्रबंधन और आउटसोर्सिंग कंपनियां नियोजन नीति का पालन नहीं कर रही हैं. विस्थापितों को उनके अधिकार के अनुसार रोजगार मिलना चाहिए.
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मांग पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन
आंदोलनकारियों ने कहा कि जब तक विस्थापित परिवारों को योग्यता के अनुसार नियोजन और मुआवजा नहीं मिलता, तब तक बंदी जारी रहेगी. मोर्चा ने इसे अनिश्चितकालीन आंदोलन बताया है.
आंदोलन में सन्नी कुमार बेसरा, किशुन नायक, सलीम, धनीराम बेदिया, सुनील मुर्मू, टुकला मांझी, रायन करमाली, शीलन मुर्मू, नायला मुर्मू, संजय बेदिया, हरिलाल बेदिया, अनिल मांझी, विक्रम हेंब्रम, मुकेश बेदिया, संजय करमाली, फूलचंद मुर्मू, विक्रम मुर्मू, संजय उरांव, बाबू करमाली, बाली करमाली और भुनेश्वर राम समेत कई लोग शामिल थे.