Tuesday, 3 November 2026
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शाहजहांपुर में राज्यपाल का शिक्षा पर सख्त संदेश, 75 फीसदी हाजिरी के बिना नहीं चलेगा काम, एआई और अंतरिक्ष विज्ञान में भविष्य तलाशें युवा

INT News3 November 2026 at 08:39 pm

Anandiben Patel in Shahjahanpur: (पवन तोमर) उच्च शिक्षा को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार करने और विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक अनुशासन मजबूत करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल मंगलवार को स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय पहुंचीं. यहां उन्होंने शिक्षण व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली, शोध कार्यों और विश्वविद्यालय के विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की. इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों की कक्षाओं में कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित कराने और परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए.

पढ़ाई में लापरवाही पर लगे लगाम

राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों में केवल प्रवेश और परीक्षा कराना ही उद्देश्य नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना भी प्राथमिकता होनी चाहिए. उन्होंने कमजोर प्रदर्शन करने वाले छात्रों की पहचान कर उनके लिए अतिरिक्त कक्षाएं और विशेष शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराने को कहा. साथ ही परीक्षा परिणाम और विद्यार्थियों के प्रदर्शन का नियमित विश्लेषण करने पर जोर दिया.

पुस्तकालय की धरोहर को डिजिटल पहचान देने की पहल

विश्वविद्यालय परिसर के निरीक्षण के दौरान राज्यपाल ने पुस्तकालय में रखी ऐतिहासिक एवं दुर्लभ पांडुलिपियों को देखा. उन्होंने कहा कि पुरानी पुस्तकों और पांडुलिपियों को सुरक्षित रखने के साथ उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाए, ताकि शोधार्थियों और विद्यार्थियों को इनका लाभ मिल सके. ई-बुक्स, ई-जर्नल्स और ऑनलाइन अध्ययन सामग्री की उपलब्धता बढ़ाने के भी निर्देश दिए. इस अवसर पर उन्होंने नवनिर्मित वाचनालय और अतिगोपनीय कक्ष का उद्घाटन किया.

नई तकनीक में दक्ष बनें युवा

विज्ञान प्रयोगशालाओं में विद्यार्थियों से बातचीत करते हुए राज्यपाल ने उन्हें पारंपरिक पढ़ाई से आगे बढ़कर आधुनिक अनुसंधान से जुड़ने की सलाह दी. उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), अंतरिक्ष विज्ञान और नई तकनीकों को भविष्य के महत्वपूर्ण क्षेत्र बताते हुए इन पर गंभीरता से काम करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि प्रयोगशालाओं में केवल उपकरण रखने से उद्देश्य पूरा नहीं होगा, बल्कि वहां व्यावहारिक प्रयोग और वास्तविक शोध कार्य भी होने चाहिए.

नशे के खिलाफ युवाओं की भागीदारी जरूरी

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए आनंदीबेन पटेल ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक महत्व तभी है, जब उसका उपयोग समाज और देश के विकास में हो. उन्होंने नशामुक्त भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए विद्यार्थियों से जागरूकता अभियान का हिस्सा बनने की अपील की. उनके मुताबिक स्वस्थ जीवनशैली, आत्मनिर्भरता और सामाजिक जिम्मेदारी को युवाओं को अपनी प्राथमिकता बनाना चाहिए.

नैक मूल्यांकन और रोजगारपरक शिक्षा पर जोर

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन को नैक मूल्यांकन की तैयारियां समय रहते शुरू करने के निर्देश दिए. उन्होंने शिक्षकों की उपलब्धता, आधारभूत सुविधाओं और शैक्षणिक संसाधनों को बेहतर बनाने की आवश्यकता बताई. छात्राओं की अच्छी उपस्थिति पर प्रसन्नता जताते हुए उन्होंने कहा कि बेटियां मेहनत और लगन से शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना रही हैं. विश्वविद्यालय को आत्मनिर्भर और आदर्श संस्थान के रूप में विकसित करने का भी संदेश दिया.

तीन पुस्तकों का किया विमोचन

दौरे के दौरान राज्यपाल ने तीन शैक्षणिक पुस्तकों का विमोचन किया. इनमें कुलपति प्रो. पुष्पेंद्र बहादुर सिंह और डॉ. प्रवेंद्र दीक्षित की पुस्तक 'मार्केटिंग रिसर्च', डॉ. जेएस ओझा की 'हिंदू लॉ' तथा डॉ. जेएस ओझा, डॉ. अनिल कुमार और डॉ. प्रदीप कुमार सिंह की 'न्यू क्रिमिनल लॉ रेजीम एंड ह्यूमन राइट्स इन इंडिया' शामिल हैं. इससे पहले विश्वविद्यालय पहुंचने पर कुलपति प्रो. पुष्पेंद्र बहादुर सिंह और अन्य अधिकारियों ने उनका स्वागत किया. राज्यपाल ने परिसर स्थित ब्रह्मलीन स्वामी शुकदेवानंद जी के मंदिर में पहुंचकर पूजा-अर्चना भी की. कार्यक्रम के समापन पर उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में पौधारोपण किया.

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