Monday, 14 September 2026
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साहित्य संवाद में भाषा-समाज के बदलते रिश्ते पर चर्चा:‘महाभोज’ और ‘राग दरबारी’ के किरदार याद किए, साहित्यकार बोले-अच्छा लिखने के लिए पढ़ना जरूरी

INT News14 September 2026 at 09:47 am

जबलपुर में हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर साहित्य संवाद का आयोजन किया गया। इसमें साहित्य, समाज और भाषा के बीच गहरे संबंध पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि समय के साथ समाज और दुनिया बदलती है और इसका असर भाषा पर भी दिखाई देता है। नया साहित्य अपने दौर की परिस्थितियों और समकालीन मुद्दों को सामने लाता है। संवाद के दौरान महान लेखकों की भूली-बिसरी किताबों और उनके चर्चित किरदारों को याद किया गया। मन्नू भंडारी के उपन्यास ‘महाभोज’ के ‘दा साहब’ और श्रीलाल शुक्ल के ‘राग दरबारी’ के ‘रूपन बाबू’ जैसे पात्रों पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने बताया कि इन किरदारों के जरिए उस दौर के समाज और उसकी जटिलताओं को समझा जा सकता है। अच्छा लिखने के लिए पढ़ना जरूरी कार्यक्रम में पढ़ने की आदत को साहित्य और लेखन के लिए जरूरी बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि अच्छा लिखने के लिए लगातार और गहरा अध्ययन करना जरूरी है। किताबें केवल जानकारी नहीं देतीं, बल्कि व्यक्ति के विचारों को गहराई और दृष्टिकोण भी देती हैं। पुरानी और क्लासिक किताबों का अध्ययन आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है। वक्ताओं ने कहा कि सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म आज विजुअलाइजेशन उपलब्ध करा रहे हैं, लेकिन समाज की वास्तविकता और उसके सही नजरिए को समझने की क्षमता किताबों में अधिक गहराई से मिलती है। युवाओं ने साहित्यकारों से की चर्चा साहित्य संवाद में युवाओं ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने साहित्यकारों और इतिहासकारों के साथ हिंदी साहित्य की किताबों, कहानियों और पात्रों पर बातचीत की। चर्चा का उद्देश्य वर्तमान और पुराने समाज के बीच आए बदलावों को साहित्य के माध्यम से समझना था। वक्ताओं ने कहा कि समय बदलने के बावजूद अच्छा साहित्य अपनी प्रासंगिकता नहीं खोता। किताबें न केवल वर्तमान को समझने में मदद करती हैं, बल्कि पिछली पीढ़ियों और उनके दौर की सामाजिक परिस्थितियों से भी जोड़ती हैं।