Saturday, 8 August 2026
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पानीपत टेक्सटाइल उद्योग पर वैश्विक तनाव का साया:निर्यात ठप, लागत बढ़ने से व्यापारी परेशान; इंस्टड्री चेयरमैन बोले- बहुत बुरे दौर में है व्यापार

INT News8 August 2026 at 04:42 pm

विश्व मानचित्र पर टेक्सटाइल सिटी के रूप में अपनी खास पहचान बनाने वाला हरियाणा का पानीपत शहर इस समय एक गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। वैश्विक स्तर पर छिड़े युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव ने पानीपत के प्रसिद्ध हैंडलूम उद्योग की कमर तोड़कर रख दी है। लगातार बनते-बिगड़ते अंतरराष्ट्रीय हालातों और स्थानीय आर्थिक चुनौतियों के बीच उद्योग का अस्तित्व बचाए रखना उद्यमियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। पानीपत चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन विनोद धमीजा ने क्षेत्र के टेक्सटाइल और हैंडलूम उद्योग की मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इस संकट के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से सामने रखा है। युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर चेयरमैन विनोद धमीजा के अनुसार, पानीपत के हैंडलूम और टेक्सटाइल उद्योग की स्थिति वर्तमान में बिल्कुल भी संतोषजनक नहीं है। उन्होंने बताया कि बीच में कुछ समय के लिए जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी युद्ध रुका था, तब पानीपत के निर्यातकों और व्यापारियों को उम्मीद की एक किरण दिखाई दी थी। व्यवसायियों को लगा था कि अब वैश्विक बाजार में मांग सामान्य होगी और उनका रुका हुआ काम फिर से रफ़्तार पकड़ेगा। हालांकि, यह राहत बहुत कम समय के लिए रही। जल्द ही फिर से जंग छिड़ गई और स्थिति पहले से भी अधिक तनावपूर्ण हो गई। युद्ध के दोबारा शुरू होने से अंतरराष्ट्रीय रसद (लॉजिस्टिक्स), जहाजरानी और सप्लाई चैन पूरी तरह से बाधित हो गई। नतीजतन, पानीपत का निर्यात और नया ऑर्डर मिलने का काम एक बार फिर पूरी तरह से ठप हो गया। अमेरिकी बाजार पर अत्यधिक निर्भरता पानीपत के हैंडलूम उद्योग के इस बड़े आर्थिक नुकसान का एक सबसे मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी प्रभुत्व है। धमीजा ने खुलासा किया कि पानीपत का लगभग 60 प्रतिशत हैंडलूम और टेक्सटाइल व्यापार सीधे तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) के साथ होता है। अमेरिका पानीपत के होम-टेक्सटाइल उत्पादों (जैसे पर्दे, बेडशीट, कालीन और मैट) का सबसे बड़ा खरीदार है। युद्ध के कारण अमेरिका में आई आर्थिक मंदी, मुद्रास्फीति और उपभोक्ता मांग में आई भारी गिरावट का सबसे ज्यादा नकारात्मक असर पानीपत के कारखानों पर पड़ा है। चीन और बांग्लादेश से व्यापार पर रखे विचार चीन और बांग्लादेश के साथ व्यापारिक संबंधों पर बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि पानीपत का चीन के साथ बहुत बड़े पैमाने पर एक्सपोर्ट (निर्यात) कभी भी नहीं रहा है। बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी एक अलग जगह है। पानीपत का बांग्लादेश से ज्यादा लेन-देन या प्रत्यक्ष व्यापार नहीं है, लेकिन बांग्लादेश ग्लोबल टेक्सटाइल मार्केट में भारत का एक बड़ा और कड़ा प्रतिस्पर्धी (कॉम्पीटर) जरूर है। कर नीतियों और सरकारी नीतियों की वास्तविकता देश में लागू नई टैक्स पॉलिसी पर अपने विचार रखते हुए चेयरमैन ने माना कि यह नीति सामान्य व्यावसायिक परिस्थितियों में व्यापार के लिए काफी लाभकारी सिद्ध हो सकती है। लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि जब मुख्य काम-धंधा ही पूरी तरह से ठप पड़ा है, तो ऐसी स्थिति में कोई भी कर नीति व्यापारियों को कैसे राहत पहुंचा सकती है? उन्होंने कहा कि जब तक कारखानों में उत्पादन नहीं होगा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिक्री नहीं होगी, तब तक कागजों पर बनी नीतियों का वास्तविक धरातल पर कोई लाभ नहीं मिलेगा। राहत देने के लिए उन्होंने सरकार से मांग की सरकार को वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अपनी टैक्स पॉलिसी और अन्य औद्योगिक नीतियों में तुरंत आवश्यक फेरबदल करने चाहिए। ऐसे विशेष प्रावधान और राहत पैकेज लाए जाएं, जिससे इस मंदी के दौर में व्यापारियों और उद्यमियों को वास्तविक फायदा पहुंच सके। बढ़ती लागत और घरेलू चुनौतियां पानीपत का राजस्व और अर्थव्यवस्था पूरी तरह से टेक्सटाइल उद्योग पर ही टिकी हुई है। चेयरमैन धमीजा ने याद दिलाया कि पानीपत का सबसे बड़ा टैक्सपेयर यहाँ का टेक्सटाइल उद्यमी ही है। लेकिन आज जब यह उद्योग अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है, तो सरकार का ध्यान और सहयोग की उम्मीद कई गुना बढ़ जाती है। वैश्विक मंदी के अलावा स्थानीय स्तर पर भी उद्यमियों को कई मोर्चों पर दो-चार होना पड़ रहा है। इन तीन मुख्य समस्याओं के बारे में बताया निष्कर्ष और सरकार से अपेक्षाएं पानीपत चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री का मानना है कि यदि समय रहते सरकार ने इस ओर ठोस कदम नहीं उठाए, तो पानीपत का ऐतिहासिक टेक्सटाइल उद्योग पूरी तरह से मंदी की चपेट में आ जाएगा। इससे न केवल अरबों रुपये के विदेशी व्यापार का नुकसान होगा, बल्कि लाखों मजदूरों के रोजगार पर भी सीधा संकट आ खड़ा होगा। उद्यमियों की मांग है कि सरकार तत्काल प्रभाव से इस सेक्टर के लिए विशेष सब्सिडी बहाल करे, टैक्स में छूट दे और लॉजिस्टिक्स को आसान बनाने के लिए ठोस कदम उठाए, ताकि पानीपत का यह गौरवशाली उद्योग फिर से अपने पैरों पर खड़ा हो सके।