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इमरान खान को बॉम्बे हाई कोर्ट से फटकार? NRI और विदेशी नागरिकों को भारत में कौन-कौन से अधिकार मिलते हैं?

अभिनेता इमरान खान इन दिनों चर्चा में हैं. उनका मामला बॉम्बे हाई कोर्ट में चल रहा है. मुंबई में SIR के खिलाफ हुए प्रदर्शन में शामिल होने के बाद विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) ने उन्हें भारत छोड़ने का नोटिस जारी किया था.
2 नवंबर 2026 को सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनसे बिना शर्त माफी मांगने और भविष्य में किसी भी प्रदर्शन में शामिल नहीं होने का लिखित आश्वासन देने को कहा. इमरान खान अमेरिकी नागरिक हैं और उनके पास भारत का OCI (Overseas Citizen of India) कार्ड है.
कोर्ट ने साफ किया कि OCI कार्डधारकों को भारतीय नागरिकों के बराबर राजनीतिक और संवैधानिक अधिकार नहीं मिलते. इमरान खान ने माफी और लिखित आश्वासन दिया. इसके बाद कोर्ट ने Leave India Notice पर अंतरिम रोक 7 दिसंबर तक जारी रखी.
लेकिन इस मामले के बीच एक बड़ा सवाल है. क्या विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिक और दूसरे देशों के नागरिकों को भारत में समान अधिकार मिलते हैं.
NRI और OCI कार्डधारक में क्या अंतर है?
दोनों के बीच अंतर समझना ज़रूरी है.
*NRI: ऐसा भारतीय नागरिक जिसके पास भारतीय पासपोर्ट है, लेकिन वह नौकरी, पढ़ाई या कारोबार के लिए विदेश में रहता है.
OCI कार्डधारक: ऐसा विदेशी नागरिक जिसके पास दूसरे देश का पासपोर्ट है और उसे भारत सरकार ने OCI कार्ड दिया है.
भारत में दोहरी नागरिकता का प्रावधान नहीं है. इसलिए OCI कार्ड मिलने का मतलब भारतीय नागरिक बन जाना नहीं है.
NRI को भारतीय संविधान से कौन से अधिकार मिलते हैं?
NRI भारतीय नागरिक होते हैं. इसलिए उन्हें भारत में नागरिकों के लिए तय मौलिक अधिकार मिलते हैं.
अनुच्छेद 14: कानून के सामने बराबरी.
अनुच्छेद 15: धर्म, जाति, लिंग और जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव से सुरक्षा.
अनुच्छेद 16: सरकारी नौकरी में बराबरी के मौके.
अनुच्छेद 19: बोलने, अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन सहित छह आज़ादियां.
अनुच्छेद 21: जीने और व्यक्तिगत आज़ादी का हक़.
अनुच्छेद 25: धर्म मानने और उसका पालन करने की आज़ादी.
NRI को वोट देने का हक़ भी मिलता है. इसके लिए उन्हें भारतीय नागरिक बने रहना और चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार Overseas Elector के तौर पर रजिस्टर कराना ज़रूरी है. वोट डालने के लिए उन्हें भारत में अपने तय मतदान केंद्र पर पहुंचना होता है.
विदेशी नागरिकों को भारत में कौन से मौलिक अधिकार मिलते हैं?
भारतीय संविधान में कुछ अधिकार सिर्फ़ नागरिकों के लिए नहीं, बल्कि हर इंसान के लिए हैं.
अनुच्छेद 14: कानून के सामने बराबरी.
अनुच्छेद 20: जुर्म के मामलों में कानूनी सुरक्षा.
अनुच्छेद 21: जीने और व्यक्तिगत आज़ादी का हक़.
अनुच्छेद 22: गिरफ्तारी और हिरासत के मामलों में कानूनी सुरक्षा.
अनुच्छेद 23: इंसानी तस्करी और ज़बरन मज़दूरी के ख़िलाफ़ सुरक्षा.
अनुच्छेद 25: धर्म की आज़ादी.
हालांकि, विदेशी नागरिकों को भारत में रहने और बसने का वैसा मौलिक हक़ नहीं मिलता, जैसा भारतीय नागरिकों को है.
OCI कार्डधारकों को कौन से अधिकार नहीं मिलते?
OCI कार्डधारकों को भारत में आने-जाने और रहने की कई सहूलियतें मिलती हैं, लेकिन उन्हें भारतीय नागरिकों जैसे सियासी हक़ नहीं मिलते.
वे लोकसभा और विधानसभा के इलेक्शन में वोट नहीं डाल सकते.
वे सांसद या विधायक नहीं बन सकते.
वे राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक ओहदों पर नहीं बैठ सकते.
आम तौर पर सरकारी नौकरियों में भर्ती का हक़ नहीं मिलता, हालांकि कुछ अपवाद हैं. मसलन, कुछ सरकारी पदों पर भर्ती के लिए OCI कार्ड होल्डर्स को भी अप्लाई करने की इजाज़त दी जा सकती है, लेकिन यह खास नियमों और कैडर पर निर्भर करता है.
खेती की ज़मीन, फ़ार्म हाउस और प्लांटेशन प्रॉपर्टी खरीदने पर रोक है.
अनुच्छेद 19 के तहत मिलने वाली आज़ादियों का दावा भारतीय नागरिकों की तरह नहीं कर सकते.
NRI और विदेशी नागरिकों के अधिकारों में क्या है फ़र्क?
सीधी बात यह है कि NRI भारतीय नागरिक है, जबकि OCI कार्डहोल्डर विदेशी नागरिक है. भारतीय संविधान विदेशी नागरिकों को भी जीने, बराबरी और व्यक्तिगत आज़ादी जैसे हक़ देता है, लेकिन वोट देने, चुनाव लड़ने और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े नागरिक अधिकार सबको नहीं मिलते.
इमरान खान का मामला इसी फ़र्क को समझने का एक अहम मिसाल है. यह अंतर समझना इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि यह OCI धारकों के लिए बहुत मायने रखता है, खासकर उन लोगों के लिए जो भारत में रहना या काम करना चाहते हैं, क्योंकि यह उनकी नागरिकता और अधिकारों को प्रभावित करता है.