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UP Panchayat Voter List: यूपी में वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए पूरी करनी होगी ये शर्त, योगी कैबिनेट का फैसला, जानें पूरी जानकारी

UP Panchayat Voter List: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए अब गांव में रहने की अवधि तय कर दी गई है. योगी सरकार की कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश पंचायत राज (सामान्य निवास अवधारणा) नियमावली-2026 को मंजूरी दे दी है. इसके तहत किसी गांव का सामान्य निवासी माने जाने के लिए लगातार छह महीने तक वहां रहना जरूरी होगा. इसके साथ ही गांव में रहने का प्रमाण देने के लिए आधार कार्ड, बिजली बिल या टेलीफोन बिल जैसे दस्तावेज भी मांगे जा सकते हैं.
पहले तय नहीं थी गांव में रहने की अवधि
पंचायत चुनाव की मतदाता सूची में नाम जोड़ने को लेकर पहले गांव में रहने की कोई निश्चित अवधि तय नहीं थी. वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव के दौरान यह सवाल उठा था कि किसी व्यक्ति को गांव का सामान्य निवासी मानने के लिए किन आधारों पर फैसला किया जाए. इस मामले में 10 और 20 नवंबर 2015 को आदेश भी पारित किए गए थे. बाद में इन आदेशों को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई. विवाद का मुख्य मुद्दा यही था कि मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए सामान्य निवास कैसे तय किया जाए.
नई नियमावली से क्या बदलेगा?
उत्तर प्रदेश पंचायत राज (सामान्य निवास अवधारणा) नियमावली-2026 को मंजूरी मिलने के बाद पंचायत मतदाता सूची तैयार करने के लिए पूरे प्रदेश में एक जैसे नियम लागू करने का रास्ता साफ हुआ है. इससे अधिकारियों को यह तय करने में मदद मिलेगी कि कौन व्यक्ति किसी गांव का सामान्य निवासी है. सरकार को उम्मीद है कि इससे फैसलों में एकरूपता और पारदर्शिता आएगी. साथ ही, मतदाता सूची में नाम जोड़ने को लेकर होने वाले विवाद और अदालतों में पहुंचने वाले मामलों को कम करने में भी मदद मिल सकती है.
हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव को लेकर क्या कहा?
पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं. इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का आदेश दिया है. अदालत ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए रखने के सरकार के फैसले को भी सही ठहराया और उन्हें प्रशासक के रूप में काम करते रहने की अनुमति दी. राज्य सरकार ने चुनाव में देरी के लिए परिसीमन की प्रक्रिया का हवाला दिया था.
चुनाव टालने के सरकारी फैसले को दी गई थी चुनौती
याचिकाकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा 12(3-ए) का हवाला देते हुए चुनाव टालने और ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए रखने से जुड़े 25 और 26 मई के सरकारी आदेशों को चुनौती दी थी. उनका कहना था कि वर्ष 2000 में प्रेम लाल पटेल के मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ इस प्रावधान को संविधान के अनुच्छेद 243ई और 243के के खिलाफ बताते हुए असंवैधानिक घोषित कर चुकी है. इसी आधार पर पंचायत चुनाव और प्रशासकों की नियुक्ति को लेकर अदालत में सवाल उठाए गए.
पंचायत वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने वालों को ध्यान देना होगा
नई नियमावली का उद्देश्य पंचायत मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए सामान्य निवास की स्पष्ट पहचान तय करना है. गांव में रहने की अवधि और पते से जुड़े दस्तावेज इस प्रक्रिया में अहम हो सकते हैं. हालांकि, मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए लागू होने वाली पूरी प्रक्रिया और दस्तावेजों की अंतिम जानकारी संबंधित सरकारी निर्देशों के अनुसार देखनी चाहिए. पंचायत चुनाव की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह नियम महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे गांव के सामान्य निवासी होने के निर्धारण पर असर पड़ेगा.
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