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दो से ज्यादा बच्चे होने पर पंचायत चुनाव लड़ने से रोकने वाला कानून बदलेगा? सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद क्या होगा महाराष्ट्र का अगला कदम

याचिकाकर्ता के वकील प्रतीक बोंबर्डे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में उन राज्यों का उदाहरण दिया है, जिन्होंने दो बच्चों की शर्त को खत्म कर दिया है. महाराष्ट्र में अब भी यह नियम लागू है. ऐसे में राज्य सरकार को भी इस पर दोबारा विचार करना चाहिए. उनके मुताबिक, सरकार के पास दो रास्ते हैं. वह खुद इस कानून में बदलाव करे या बड़ी पीठ के सामने अपने कानून के पक्ष में दलील दे.
दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए बोंबर्डे ने कहा कि फिलहाल यह मामला महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम की एक खास धारा से जुड़ा है. इसी प्रावधान के तहत दो से अधिक बच्चे होने पर किसी व्यक्ति को ग्राम पंचायत चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराया जा सकता है.
वीडियो में देखें याचिकाकर्ता के वकील ने क्या कहा-
क्या है पूरा मामला?
यह मामला महाराष्ट्र की पूर्व सरपंच मंगला भीमराव इंगले से जुड़ा है. उन्हें तीसरी संतान होने के आधार पर महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम, 1959 की धारा 14(1)(j-1) के तहत अयोग्य घोषित किया गया था. इसके बाद उन्होंने इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
इस कानून के मुताबिक, दो से अधिक बच्चे होने पर कोई व्यक्ति ग्राम पंचायत का सदस्य बनने के योग्य नहीं रहता. यह नियम 13 सितंबर 2000 से लागू है. सुप्रीम कोर्ट ने अब इस नियम की संवैधानिक वैधता पर दोबारा विचार करने के लिए मामला बड़ी पीठ को भेज दिया है.
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प्रजनन दर घटने का हवाला देकर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने देश में घटती प्रजनन दर यानी फर्टिलिटी रेट का भी जिक्र किया. अदालत के मुताबिक, साल 2003 में भारत की कुल प्रजनन दर 3 थी, जो अब घटकर 1.9 रह गई है. यह 2.1 की रिप्लेसमेंट रेट से भी कम है. प्रजनन दर 2.1 के आसपास रहने पर लंबे समय में आबादी का स्तर स्थिर रहने की उम्मीद होती है.
सुप्रीम कोर्ट ने इसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए सवाल उठाया कि जब देश में बच्चों की औसत संख्या घट रही है, तो दो से अधिक बच्चे होने पर चुनाव लड़ने से रोकने वाले कानून की आज कितनी जरूरत रह गई है. अदालत ने 2003 के जावेद बनाम हरियाणा राज्य फैसले पर भी दोबारा विचार की जरूरत बताई है. उस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने दो बच्चों की शर्त को वैध माना था.