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खड़े हनुमान मंदिर में आधी रात को प्रतिमा की स्कैनिंग:बेस की गहराई नापने भोपाल से उज्जैन पहुंची विशेषज्ञों की टीम; पार्षद ने पूछा- गुपचुप जांच क्यों?
उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर में स्थापित प्राचीन प्रतिमा को हटाने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। मंदिर का मुख्य ढांचा हटाए जाने के करीब डेढ़ महीने बाद प्रशासनिक टीम मंगलवार की देर शाम विशेष मशीनों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ मंदिर पहुंची थी। यहां प्रतिमा और उसके आसपास के हिस्से की स्कैनिंग की गई। जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की गई कि प्रतिमा का आधार जमीन के अंदर कितनी गहराई तक है और उसके नीचे की संरचना कैसी है। हालांकि, जांच के बाद प्रतिमा को हटाने की आगे कोई कार्रवाई होगी या नहीं, इस पर प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। भोपाल से पहुंची विशेषज्ञों की टीम, डेढ़ घंटे तक चली स्कैनिंग स्मार्ट सिटी से मिली जानकारी के अनुसार, अधिकारियों की टीम विशेष मशीनों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ मंदिर पहुंची थी। टीम करीब एक से डेढ़ घंटे तक मंदिर में रही। इस दौरान प्रतिमा और उसके आसपास के हिस्से की अलग-अलग तरीकों से स्कैनिंग की गई। पार्षद बोले- रात में गुपचुप जांच क्यों? भाजपा पार्षद शिवेंद्र तिवारी ने देर रात जांच कराने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि प्रशासन प्रतिमा की संरचना की जांच करना चाहता है, तो उसे पारदर्शी तरीके से सबके सामने जांच करनी चाहिए। रात के अंधेरे में बिना सार्वजनिक जानकारी दिए टीम के पहुंचने से श्रद्धालुओं के बीच भ्रम और आशंका पैदा हो रही है। उन्होंने प्रशासन से प्रतिमा को लेकर अपनी मंशा स्पष्ट करने की मांग की। तिवारी ने दावा किया कि जांच के दौरान कुछ स्थानों पर उपकरण लगाने के बाद उनकी बैटरी अचानक डिस्चार्ज हो गई। अधिकारियों को उपकरण दोबारा चार्ज करने पड़े। इसे लेकर नाराजगी भी जताई गई। तिवारी ने इस घटना को भगवान का संकेत बताया। 30 अगस्त से शुरू हुई थी मंदिर हटाने की कार्रवाई खड़े हनुमान मंदिर को हटाने की कार्रवाई 30 अगस्त 2026 को शुरू करने का प्रयास हुआ था, लेकिन श्रद्धालुओं और हिंदू संगठनों के विरोध के कारण इसे रोकना पड़ा। 1 सितंबर को टीम दोबारा पहुंची और करीब 16 घंटे की कार्रवाई में मंदिर का शिखर व ऊपरी हिस्सा हटाया गया। इसके बाद 4 सितंबर को मुख्य ढांचा भी हटा दिया गया। प्रशासन की योजना करीब 8 फीट ऊंची प्रतिमा को टंकी चौक के पास बने नए मंदिर में स्थापित करने की थी। टेंट के नीचे विराजमान हैं खड़े हनुमान मंदिर का मुख्य ढांचा हटाए जाने के बाद प्रतिमा की सुरक्षा के लिए उसके ऊपर कैनोपी यानी टेंट लगाया गया है। कुछ श्रद्धालु इसकी तुलना अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से पहले भगवान राम के टेंट में विराजमान रहने की स्थिति से कर रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि प्रतिमा को मूल स्थान पर सुरक्षित रखकर जनभावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।