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झारखंड में UPSC PT पास करने पर मिलेंगे 1.5 लाख रुपये, फिर भी आए सिर्फ 4 आवेदन

रांची: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (PT) पास करने वाले अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए चलाई जा रही 'सीएम एसटी-एससी सिविल सेवा योजना' में एक हैरान करने वाला आंकड़ा सामने आया है. अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार की बेहतर तैयारी के लिए झारखंड सरकार द्वारा दी जाने वाली सहायता राशि में इसी वर्ष 50 हजार रुपये की बढ़ोतरी कर इसे 1.5 लाख रुपये कर दिया गया था. इससे पहले 1 लाख रुपये मिलते थे. सरकार ने 31 जुलाई तक आवेदन आमंत्रित किए थे, लेकिन पूरे राज्य से मात्र 4 अभ्यर्थियों (2 एससी और 2 एसटी) ने ही इस आर्थिक मदद के लिए आवेदन किया है.
आय सीमा 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये की
राज्य के अधिक से अधिक होनहार छात्र इस योजना का लाभ उठाकर मुख्य परीक्षा की तैयारी कर सकें, इसके लिए सरकार ने पारिवारिक वार्षिक आय सीमा में बड़ा बदलाव किया था. पहले जहां 2.50 लाख रुपये तक की आय वाले अभ्यर्थी ही पात्र थे, वहीं इस बार आय सीमा को बढ़ाकर सीधे 8 लाख रुपये वार्षिक कर दिया गया था. इसके बावजूद आवेदनों का आंकड़ा दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सका, जो प्रशासनिक स्तर पर योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
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कल्याण मंत्री का बयान: 'प्रचार-प्रसार बढ़ाएंगे और वजहों का पता लगाएंगे'
इस पूरे मामले पर राज्य के कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने कहा है कि "इस वर्ष से योजना की राशि बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये की गई थी और आय सीमा भी 8 लाख रुपये की गई. इसके बावजूद कम संख्या में आवेदन आने के कारणों का गहन विश्लेषण किया जाएगा और आने वाले समय में योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाएगा."
आखिर क्यों आए सिर्फ 4 आवेदन? समझें 3 मुख्य कारण
योजना की जानकारी और प्रचार-प्रसार का अभाव
यूपीएससी पीटी पास करने वाले कई दूर-दराज के एससी-एसटी अभ्यर्थियों तक इस योजना, इसके बदले हुए नियमों और आवेदन प्रक्रिया की सही समय पर जानकारी ही नहीं पहुंच सकी.
दोहरी सहायता न लेने का नियम
योजना के प्रावधानों के अनुसार, जो अभ्यर्थी केंद्र सरकार या किसी अन्य राज्य सहायता योजना से पहले ही वित्तीय मदद ले रहे हैं, वे इस योजना के पात्र नहीं होते.
पीटी में सफल अभ्यर्थियों की कम संख्या
झारखंड से यूपीएससी पीटी परीक्षा में सफल होने वाले एससी-एसटी अभ्यर्थियों की कुल संख्या में ही कमी होना भी इस कम आवेदन दर का एक प्रमुख कारण हो सकता है.
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