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बिहार के अस्पतालों का सच: 3 हजार की आबादी पर एक डॉक्टर, 10 मिनट की जगह मिल रहे मरीज को सिर्फ दो मिनट

पटना. बिहार के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी अब मरीजों के इलाज की गुणवत्ता पर भारी पड़ने लगी है. राष्ट्रीय मानकों के अनुसार एक मरीज की बीमारी समझने, मेडिकल हिस्ट्री जानने, शारीरिक परीक्षण करने, उचित परामर्श देने के लिए डॉक्टर को 10 से 15 मिनट का समय देना चाहिये, लेकिन, बिहार के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़ के कारण डॉक्टर एक मरीज को महज दो से तीन मिनट ही दे पा रहे है.
बीमारी की सही पहचान बनी चुनौती
मरीजों की पूरी जांच और बीमारी की सही पहचान चुनौती बनती जा रही है. वहीं, एक ओर सरकार आधुनिक सुविधाओं से लैस अस्पतालों का निर्माण करा रही है, वहीं दूसरी ओर डॉक्टरों की कमी के कारण इन सुविधाओं का पूरा लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है. पीएमसीएच, एनएमसीएच व आइजीआइएमएस सहित मेडिकल कॉलेज अस्पतालों से लेकर जिला अस्पतालों तक ओपीडी के बाहर सुबह से ही लंबी कतारें लग रही है.
खास बातें
डॉक्टरों की कमी से इलाज की गुणवत्ता पर संकट,
बिहार के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी का बढ़ता दबाव, विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी किल्लत से मरीज परेशान
पीएमसीएच में रोजाना 3,000 से अधिक, एनएमसीएच में 1,722 मरीज पहुंच रहे ओपीडी
बिहार में तीन हजार लोगों पर एक एलोपैथिक डाक्टर, जूनियर और आयुष डॉक्टरों के भरोसे ओपीडी व्यवस्था
51 प्रतिशत नियमित और 71.8 प्रतिशत संविदा पद खाली
1. बिहार स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों के स्वीकृत एवं रिक्त पद
2. प्रमुख अस्पतालों में डॉक्टरों की स्थिति और मरीजों का दबाव
3. एनएमसीएच में वर्ष 2025 के दौरान मरीजों का आंकड़ा
4. मेडिकल कॉलेजों में सर्वाधिक भीड़ वाले विभाग
प्रमुख आंकड़े
नियमित और संविदा मिलाकर डॉक्टरों के कुल 12,163 पद रिक्त हैं.
कुल स्वीकृत पदों में लगभग 55.7% पद खाली हैं.
पीएमसीएच में फैकल्टी के 203 पद रिक्त हैं.
एनएमसीएच में वर्ष 2025 में 6.28 लाख से अधिक मरीजों ने ओपीडी में इलाज कराया.
1. बिहार में डॉक्टरों की कुल संख्या
नोट: ये निबंधित डॉक्टरों की संख्या है. इनमें सेवानिवृत्त और दिवंगत डॉक्टर भी शामिल हो सकते हैं.
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2. बिहार में डॉक्टरों के स्वीकृत और कार्यरत पद
3. मरीज की जांच और परामर्श की निर्धारित प्रक्रिया में लगने वाला समय
खबर में इस्तेमाल के लिए प्रमुख तथ्य
बिहार की आबादी करीब 13 करोड़.
करीब 63 हजार एलोपैथ डॉक्टर बिहार मेडिकल काउंसिल में निबंधित.
लगभग 3,000 की आबादी पर एक एलोपैथ डॉक्टर.
विशेषज्ञ और सुपर स्पेशियलिस्ट डॉक्टरों की अनुमानित संख्या 15–20 हजार.
सरकारी स्वास्थ्य विभाग में नियमित और संविदा मिलाकर 12,163 डॉक्टरों के पद रिक्त.
डॉक्टरों की कुल पांच श्रेणियों में 1,43,463 निबंधित डॉक्टर.
क्या कहते हैं रजिस्ट्रार
मरीज को दोबारा अपनी बात रखने का मौका @ एक-दो मिनट देने का है. कोट राज्य भर में एलोपैथ चिकित्सकों की अभी भी कमी है. राष्ट्रीय मानक के मुताबिक राज्य में करीब तीन हजार की आबादी पर एक एलोपैथ डॉक्टर है. नियमानुसार एक डॉक्टर को इलाज के दौरान एक मरीज को कम से कम 10-15 मिनट देना चाहिए. यह मेडिकल काउंसिल की गाइडलाइन में है.हालांकि,एलोपैथ,यूनानी, आयुर्वेद, होमियोपैथ और डेंटल डॉक्टरों को मिला दें, तो बिहार में करीब 1.43 लाख चिकित्सक हैं, जो आबादी के हिसाब से राष्ट्रीय मानक के करीब है.
-डॉ. सहजानंद प्रसाद सिंह, रजिस्ट्रार, बिहार मेडिकल काउंसिल.
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