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सागर की यामिनी ने कॉमनवेल्थ जूडो में जीता सिल्वर मेडल:पैर टूटने के बावजूद नहीं हारी हिम्मत, फाइनल में इंग्लैंड की खिलाड़ी से मिली शिकस्त
सागर जिले की जूडो खिलाड़ी यामिनी मौर्य ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता है। उन्होंने महिला 57 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में जगह बनाई, लेकिन स्वर्ण पदक के मुकाबले में इंग्लैंड की असेल्या टोपराक से हार गईं। यामिनी के सिल्वर मेडल के साथ राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के कुल पदकों की संख्या 20 हो गई है। इनमें 5 स्वर्ण, 11 रजत और 4 कांस्य पदक शामिल हैं। यामिनी सागर के एक सामान्य किसान परिवार से हैं। उनके पिता हरिओम मौर्य खेती करते हैं। बचपन से ही उनका रुझान खेलों की ओर था। उनके कोच दीपक रजक ने बताया कि पहली बार उन्होंने यामिनी को पुराने सदर स्कूल के मैदान में खेलते देखा था। उनकी प्रतिभा को पहचानकर उन्होंने परिवार को खेल परिसर भेजने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में पारिवारिक परंपराओं और आर्थिक कारणों से परिवार तैयार नहीं था, लेकिन समझाने के बाद यामिनी को प्रशिक्षण के लिए भेजा गया। वर्ष 2017 में एक प्रतियोगिता के दौरान यामिनी का पैर टूट गया। चोट के कारण उन्हें करीब एक वर्ष तक खेल से दूर रहना पड़ा। स्वस्थ होने के बाद उन्होंने दोबारा अभ्यास शुरू किया और लगातार चार वर्षों की कड़ी मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचीं। अब उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतकर देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुकी हैं यामिनी मौर्य इससे पहले भी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुकी हैं। उन्होंने 2022 के राष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद 2025 हांगकांग एशियन ओपन और 2026 डकार अफ्रीका ओपन में भी गोल्ड मेडल अपने नाम किया। वह दो बार सीनियर राष्ट्रीय चैंपियन रह चुकी हैं और वर्ष 2022 से लगातार भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। तीन बहनों और एक भाई में हैं यामिनी यामिनी के चाचा श्रीनाथ मौर्य ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, इसलिए शुरुआत में उन्हें बाहर खेलने भेजने में संकोच था। बाद में परिवार ने उनकी प्रतिभा को देखते हुए पूरा सहयोग किया। आज यामिनी ने सिल्वर मेडल जीतकर न केवल परिवार, बल्कि सागर और पूरे देश का नाम रोशन किया है। परिवार में यामिनी तीन बहनों और एक भाई के बीच पली-बढ़ी हैं। चाचा ने कहा कि माता-पिता बेटियों को खेल और शिक्षा में आगे बढ़ने का अवसर दें, वे भी देश का नाम रोशन कर सकती हैं।