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स्वास्थ्य विभाग के बहुउद्देशीय संवर्ग ने सासंद को सौंपा ज्ञापन:कर्मचारियों ने की समयमान वेतनमान सुधार की मांग; कहा- डाइंग कैडर' घोषित होने से रुक गई पदोन्नति
मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में बहुउद्देशीय संवर्ग के कर्मचारियों में पदोन्नति और वेतनमान की विसंगतियों को लेकर रोष है। शासन ने 5 जुलाई 2024 को आदेश जारी कर 1483 सुपरवाइजर पदों को 'डाइंग कैडर' घोषित कर दिया है। इस निर्णय से इन पदों पर कार्यरत कर्मचारियों की पदोन्नति रुक गई है। कर्मचारियों का आरोप है कि वर्तमान में इन पदों पर कर्मचारी कार्यरत हैं, ऐसे में इन्हें डाइंग कैडर घोषित करना नियम विरुद्ध है। अधिकारियों का तर्क है कि अब एमपीडब्ल्यू की सुपरवाइजर पद पर पदोन्नति संभव नहीं होगी, जिससे कर्मचारी जीवनभर एक ही पद पर बने रहने को मजबूर होंगे। एक ही संवर्ग में अलग-अलग वेतनमान विभाग में पदोन्नति के अवसर न मिलने के कारण राज्य सरकार के वित्त विभाग के नियमों के तहत 10, 20, 30 और 35 वर्षों की सेवा के बाद समयमान वेतनमान देने का प्रावधान है। हालांकि, बहुउद्देशीय संवर्ग के कर्मचारियों का कहना है कि उनके साथ वेतनमान के आवंटन में भारी भेदभाव किया जा रहा है। एक ही संवर्ग के कर्मचारियों को अलग-अलग वेतनमान और ग्रेड पे दिए जा रहे हैं। पदोन्नति का वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा कर्मचारियों ने वेतन विसंगति का उदाहरण देते हुए बताया कि यदि सुपरवाइजर पद से ब्लॉक विस्तार शिक्षक के पद पर पदोन्नति होती है, तो 2800 ग्रेड पे मिलता है। वहीं, सुपरवाइजर से मलेरिया निरीक्षक (MI) के पद पर पदोन्नति होने पर केवल 2400 ग्रेड पे ही दिया जाता है। वर्तमान में सुपरवाइजर और एमआई के पदों का वेतनमान एक समान रखा है, जिससे पदोन्नति का वास्तविक लाभ कर्मचारियों को नहीं मिल पा रहा है। स्वास्थ्य कर्मचारियों का भविष्य अनिश्चित समय पर पदोन्नति न मिलने और ग्रेड पे में इन तकनीकी कमियों के कारण बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारियों (जैसे ANM, MPW, BEE, DMO) का भविष्य अनिश्चित दिख रहा है। कर्मचारियों ने शासन से मांग की है कि सुपरवाइजर पदों को डाइंग कैडर से बाहर किया जाए। साथ ही, 10 से 35 साल की सेवा अवधि के आधार पर मिलने वाले समयमान वेतनमान और ग्रेड पे की विसंगतियों को तत्काल दूर कर उन्हें उचित न्याय दिया जाए।