समाचार · पश्चिम बंगाल
बंगाल विधानसभा में ओबीसी आरक्षण से जुड़े 2 बिल पास, 113 समुदाय सूची से बाहर

जरूरी बातें
टीएमसी के बागी रीतब्रत गुट का वॉकआउट
पक्ष में पड़े 186 वोट, विपक्ष में सिर्फ 17
संशोधन के पीछे कोई राजनीतिक मकसद नहीं : मंत्री
मई 2024 में हाईकोर्ट ने रद्द किये थे 12 लाख प्रमाण पत्र
OBC Reservation Amendment Bills: विधेयकों की मुख्य बातें और कानूनी प्रावधान
1. पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग (सेवाओं और पदों में रिक्तियों का आरक्षण) (संशोधन) विधेयक, 2026
2. पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग (संशोधन) विधेयक, 2026
OBC Reservation Amendment Bills: पश्चिम बंगाल विधानसभा ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी के आरक्षण से जुड़े 2012 के अधिनियम में संशोधन करने वाले 2 विधेयकों को सोमवार को पारित कर दिया. कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप कदम उठाते हुए सरकार ने ओबीसी आरक्षण के ढांचे को 17 फीसदी से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया है. संशोधन के बाद 66 समुदायों को ओबीसी श्रेणी में आरक्षण का लाभ मिलता रहेगा. बिना किसी क्षेत्रीय सर्वेक्षण के शामिल किये गये 113 समुदायों को इस सूची से बाहर कर दिया गया है.
टीएमसी के बागी रीतब्रत गुट का वॉकआउट
विधेयकों को पारित किये जाने के दौरान सदन में राजनीतिक ड्रामा भी देखने को मिला. विपक्ष के नेता रीतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ बागी विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया. हालांकि, ममता बनर्जी के खेमे के विधायकों ने मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लिया.
पक्ष में पड़े 186 वोट, विपक्ष में सिर्फ 17
मत विभाजन के दौरान कुल 186 विधायकों ने दोनों विधेयकों के पक्ष में मतदान किया. 17 विधायकों ने इसके खिलाफ वोट डाला. 6 सदस्यों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया. विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस ने इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के विधायक नौशाद सिद्दीकी और टीएमसी के बागी विधायक विश्वनाथ दास के विरोध और मत विभाजन के अनुरोध पर यह आदेश दिया.
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संशोधन के पीछे कोई राजनीतिक मकसद नहीं : मंत्री
विधेयक को सदन के पटल पर रखते हुए पश्चिम बंगाल के पिछड़ा वर्ग विकास मंत्री गौरीशंकर घोष ने स्पष्ट किया कि सरकार केवल हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत काम कर रही है. इसके पीछे कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है. उन्होंने कहा- पिछली सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग को दरकिनार कर दिया था. यही वजह थी कि हाईकोर्ट ने उस प्रक्रिया को अवैध घोषित किया. अब पिछड़ा वर्ग आयोग पूरी जांच करेगा और यदि उसे लगता है कि किसी नये समुदाय को शामिल किया जाना चाहिए, तो वह राज्य सरकार को अपनी सिफारिशें भेज सकता है.
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मई 2024 में हाईकोर्ट ने रद्द किये थे 12 लाख प्रमाण पत्र
मई 2024 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने वर्ष 2010 से 2012 के बीच शामिल किये गये 77 अतिरिक्त समुदायों का ओबीसी दर्जा और लगभग 12 लाख प्रमाण पत्र रद्द कर दिये थे. अदालत ने इन्हें असंवैधानिक माना था. इसके बाद राज्य सरकार ने धर्म-आधारित वर्गीकरण योजनाओं को समाप्त कर वर्ष 2010 से पहले के 66 समुदायों को नियमित किया.
OBC Reservation Amendment Bills: विधेयकों की मुख्य बातें और कानूनी प्रावधान
1. पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग (सेवाओं और पदों में रिक्तियों का आरक्षण) (संशोधन) विधेयक, 2026
इस विधेयक के तहत राज्य सरकार को पिछड़ा वर्ग आयोग के परामर्श से विभिन्न ओबीसी श्रेणियों के लिए आरक्षण का प्रतिशत तय करने का कानूनी अधिकार मिल गया है.
आरक्षित पदों का प्रतिशत आरक्षण कोटा के अनुपात में समय-समय पर संशोधित किया जा सकता है, लेकिन किसी भी स्थिति में कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा.
आयोग से सलाह के बाद सरकार ओबीसी समुदाय के नागरिकों को उनके सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत करेगी और प्रत्येक श्रेणी के लिए अलग से पद आरक्षित किये जायेंगे.
2. पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग (संशोधन) विधेयक, 2026
अब नागरिक सीधे ओबीसी सूची में शामिल होने के लिए आवेदन कर सकेंगे, जिसकी पूरी जांच आयोग द्वारा की जायेगी और वह सरकार को अपनी अंतिम सिफारिश सौंपेगा.
ओबीसी सूची में किसी समुदाय के अत्यधिक या अपर्याप्त समावेश (Inclusion) से जुड़ी शिकायतों की भी जांच आयोग करेगा और सरकार उसी के अनुरूप कदम उठायेगी.
आयोग के सदस्यों का कार्यकाल 3 साल का निर्धारित किया गया है, जबकि इसका सदस्य-सचिव एक सेवारत सरकारी अधिकारी होगा, जिसका कार्यकाल सरकार तय करेगी.
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