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शिक्षक भर्ती में पदवृद्धि को लेकर आंदोलन जारी:विभाग बोला-रिजल्ट के बाद प्रावधान नहीं; नरेंद्र राजपूत ने कहा- 2022 में भी बढ़े थे पद
शिक्षक पदवृद्धि की मांग को लेकर करीब 10 दिन से निर्जल भूख हड़ताल पर बैठे नरेंद्र राजपूत ने स्कूल शिक्षा विभाग के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें विभाग ने कहा था कि परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद पदवृद्धि का कोई प्रावधान नहीं है। राजपूत ने कहा कि यदि उनका चयन हो चुका होता तो वे पदवृद्धि की मांग ही क्यों करते। उनका दावा है कि उनकी रैंक 5427 है और 3631 तक के अभ्यर्थियों का चयन हुआ है, इसलिए वे अतिरिक्त पद बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। राजपूत ने कहा कि विभाग का यह कहना कि परिणाम जारी होने के बाद पदवृद्धि नहीं हो सकती, सही नहीं है। उन्होंने दावा किया कि पूर्व में स्कूल शिक्षा मंत्री और तत्कालीन डीपीआई आयुक्त शिल्पा सिंह के कार्यकाल में भी पद बढ़ाए गए हैं। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भी पदवृद्धि के उदाहरण हैं, ऐसे में मध्यप्रदेश में इसके लिए अलग नियम क्यों हैं। उन्होंने कहा, ‘अगर मंत्री जी को लगता है कि पदवृद्धि पूरी तरह गलत है, तो वे छात्रों के बीच आकर हमें समझाएं कि पदवृद्धि कानूनी रूप से क्यों नहीं हो सकती। हमारे पास पदवृद्धि के आदेश हैं, हम हवा में बात नहीं कर रहे हैं। रिजल्ट के बाद भी हुई हैं नियुक्तियां नरेंद्र राजपूत ने दावा किया कि वर्ष 2023 की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में भी परिणाम जारी होने के बाद आगे की काउंसलिंग और नियुक्तियां हुई थीं। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 2022 को रिजल्ट आने के बाद जुलाई-अगस्त 2024 में करीब 75 हजार पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया हुई। उनके मुताबिक संभाग, जिला और स्कूल स्तर पर भी रिजल्ट के बाद नियुक्तियां हुई हैं। राजपूत ने कहा- हम पढ़े-लिखे लोग हैं। हमें पूरी जानकारी है कि रिजल्ट के बाद भी जॉइनिंग हुई है। हमारे पास लिखित आदेश हैं। 18,750 पदों के बाद रिजल्ट आने पर दोबारा काउंसलिंग और 75 हजार पदों पर प्रक्रिया का उल्लेख है। फिर विभाग किस आधार पर कह रहा है कि रिजल्ट के बाद पदवृद्धि का कोई प्रावधान नहीं है?’ उन्होंने कहा कि सरकार को आंदोलनकारियों के साथ बैठकर इस मामले में नियम और पुराने आदेशों के आधार पर बात करनी चाहिए। राजपूत ने कहा कि वे गलत मांग के लिए करीब 10 दिन से निर्जल भूख हड़ताल पर नहीं बैठे हैं। राहुल गांधी के आने का भी दावा राजपूत ने राहुल गांधी से संपर्क और उनके आंदोलन में आने का भी दावा किया। उन्होंने कहा कि उन्हें राहुल गांधी की ओर से संदेश मिला है और उनके मुताबिक राहुल गांधी जल्द ही आंदोलन स्थल पर आ सकते हैं। राजपूत ने कहा, मेरी बात हुई है। कन्फर्म आ रहे हैं। वे इस जगह पर आएंगे। उन्होंने खुद कहा है कि मुझे लेकर चलिए वहां। ‘2022 में 7500 पद बढ़ाकर सेकंड काउंसलिंग हुई, अब दिक्कत क्या है?’ शिक्षक भर्ती में पदवृद्धि की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार को पिछले भर्ती के उदाहरणों के आधार पर इस बार भी अतिरिक्त पद बढ़ाकर सेकंड काउंसलिंग करानी चाहिए। अनशन पर बैठे नरेंद्र राजपूत के साथ प्रदर्शन कर रहे भिंड के वर्ग-3 अभ्यर्थी विनीत वर्मा ने दावा किया कि वर्ष 2022 में पद बढ़ाकर सेकंड काउंसलिंग कराई गई थी। उन्होंने कहा कि इसी आधार पर इस बार भी पद बढ़ाने की मांग की जा रही है। विनीत ने कहा कि उनके एक परिचित का पहली काउंसलिंग में चयन नहीं हुआ था। वह एससी कैटेगरी से था। बाद में सेकंड काउंसलिंग में उसका नाम आया और वर्तमान में वह विदिशा जिले में कार्यरत है। उन्होंने कहा, ‘26 नवंबर 2022 के दस्तावेज में 7500 पद बढ़ाने और सेकंड काउंसलिंग कराने की बात है। विभाग का अपना दस्तावेज है। इस बार क्या परिस्थिति बन गई कि पदवृद्धि नहीं हो सकती? अगर इस बार पदवृद्धि गलत है तो पिछली बार भी गलत रही होगी। पदवृद्धि ही आंदोलन की मुख्य मांग विनीत ने कहा कि आंदोलन को लेकर किसी तरह का भ्रम नहीं होना चाहिए। उनकी मुख्य और एकमात्र मांग पदवृद्धि है। उन्होंने कहा, ‘‘हम पहले दिन से पदवृद्धि की मांग कर रहे हैं। यहां भी साफ लिखा है कि पदवृद्धि को लेकर आंदोलन है। हमारी मांग है कि कुछ पद बढ़ाकर एक और काउंसलिंग कराई जाए, ताकि अधिक अभ्यर्थियों को मौका मिल सके।’’ उन्होंने कहा कि कई अभ्यर्थियों की परसेंटाइल काफी अधिक होने के बावजूद चयन नहीं हुआ है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि हिंदी विषय में 99.86 परसेंटाइल वाले अभ्यर्थी भी यहां आंदोलन में बैठे हैं। उनके मुताबिक पद कम होने और बैकलॉग पदों की वजह से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर नहीं मिल पा रहा है। बातचीत के बाद भी समाधान नहीं निकला विनीत ने बताया कि अभ्यर्थियों का प्रतिनिधिमंडल डीपीआई आयुक्त से भी मिला था। उनके मुताबिक, अधिकारियों की ओर से मांग पर विचार करने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों ने कुछ दिन इंतजार किया, लेकिन कोई निर्णय सामने नहीं आया। इसके बाद उन्हें डीपीआई कार्यालय के सामने आंदोलन करना पड़ा। पुलिस के नोटिस पर बोले- परमिशन हमारे पास है विनीत ने पुलिस की ओर से आंदोलन स्थल खाली करने के लिए कहे जाने का भी दावा किया। उन्होंने बताया कि मौके पर नोटिस चस्पा किया गया है, जिसमें प्रदर्शनकारियों को वहां से हटने और सड़क बाधित नहीं करने के लिए कहा गया है। विनीत का कहना है कि उनके पास प्रदर्शन की अनुमति है और वे सड़क के एक तरफ बैठे हैं, जिससे यातायात बाधित नहीं हो रहा।