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यूपी समेत 12 राज्यों में बनेगा 60 हजार स्वयंसेवकों का नेटवर्क, गृह मंत्रालय की पहल पर सेना देगी ट्रेनिंग, जानें पूरी जानकारी

UP News: उत्तर प्रदेश में भी नागरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में पहल होने जा रही है. आपदा या सुरक्षा संकट के समय प्रशिक्षित स्वयंसेवक मददगार साबित हो सकते हैं. इसी तैयारी को मजबूत करने के लिए गृह मंत्रालय 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में करीब 60 हजार स्वयंसेवकों का नागरिक सुरक्षा नेटवर्क बनाने की योजना पर काम कर रहा है. इस पायलट परियोजना में उत्तर प्रदेश भी शामिल है. खास बात यह है कि स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करने के लिए भारतीय सेना की मदद ली जाएगी। पहले चरण में संबंधित राज्यों के सिविल डिफेंस मास्टर ट्रेनरों को तीन दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा.
यूपी समेत 12 राज्यों में लागू होगी पायलट परियोजना
गृह मंत्रालय के मुताबिक, परियोजना के पहले चरण में संबंधित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के सिविल डिफेंस मास्टर ट्रेनरों को तीन दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा. इस पहल का उद्देश्य नागरिक सुरक्षा की तैयारियों को मजबूत करना है. इसमें जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, मेघालय, सिक्किम, असम, उत्तर प्रदेश, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु शामिल हैं.
प्रधानमंत्री के विजन से प्रेरित है पहल
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में व्यक्त परिकल्पना से प्रेरित है.उन्होंने सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक प्रणालियों, तकनीकों और क्षमताओं से लैस नागरिक सुरक्षा नेटवर्क बनाने की बात कही थी.इसी दिशा में गृह मंत्रालय भारतीय सेना के माध्यम से सिविल डिफेंस मास्टर ट्रेनरों को विशेष प्रशिक्षण देने की पहल कर रहा है.
सुरक्षा और आपदा राहत के लिए बनेगा ब्रॉडबैंड नेटवर्क
गृह मंत्रालय देशभर में ब्रॉडबैंड पब्लिक प्रोटेक्शन एंड डिजास्टर रिलीफ (BB-PPDR) नेटवर्क लागू करने की योजना पर भी काम कर रहा है. इसके लिए मंत्रालय ने आम लोगों और संबंधित हितधारकों से सुझाव मांगे हैं. प्रस्तावित नेटवर्क के जरिए करीब 30 लाख पुलिसकर्मियों, अर्धसैनिक बलों और आपदा राहत कर्मियों को पुश-टू-टॉक, वीडियो और डेटा संचार सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है.
10 स्थानों पर लागू करने की योजना
इस नेटवर्क के तहत राज्य पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), अग्निशमन सेवाओं, चिकित्सा सेवाओं और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को मिशन-क्रिटिकल पुश-टू-टॉक, डेटा और वीडियो सुविधाएं दी जाएंगी. इसका उद्देश्य सुरक्षा और आपदा राहत से जुड़ी एजेंसियों के बीच संचार व्यवस्था को मजबूत करना है. मंत्रालय ने इस परियोजना के लिए 10 स्थान चुने हैं. इनमें अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह, अमृतसर, बस्तर, बेंगलुरु, गुवाहाटी, लद्दाख, लक्षद्वीप, मुंबई, रुद्रप्रयाग और विशाखापत्तनम शामिल हैं.
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