समाचार · छत्तीसगढ़
मरवाही के जंगल में हथिनी ने बच्चे को दिया जन्म:52 हाथियों के दल में बढ़ी संख्या, 27 किसानों की फसलें बर्बाद; धान को नुकसान
मरवाही वन क्षेत्र के मटियाडांड़ बीट में 52 हाथियों के दल में एक हथिनी ने शावक को जन्म दिया है। अब इस दल में हाथियों की संख्या 53 हो गई है। शावक का जन्म पसान वन क्षेत्र में करीब 5 दिन पहले हुआ था। हथिनी अपने बच्चे को लेकर पसान वन परिक्षेत्र से मरवाही के जंगल में पहुंच गई है। हाथियों का दल नवजात शावक को चारों तरफ से घेरकर उसकी सुरक्षा कर रहा है। वन विभाग की टीम हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रही है। साथ ही आसपास के गांवों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क किया जा रहा है। बनखेता जंगल में मिला प्रसव के बाद का ऊतक वन विभाग के अनुसार, पसान वन परिक्षेत्र के बनखेता जंगल में करीब 5 दिन पहले हथिनी ने शावक को जन्म दिया था। नियमित गश्त के दौरान वनकर्मियों को जंगल के कक्ष क्रमांक पी-163 में प्लेसेंटा मिला। यह बच्चे के जन्म के बाद बाहर निकलने वाला ऊतक होता है। झुंड में एक हथिनी के गर्भवती होने की जानकारी पहले से वन विभाग के पास थी। ऐसे में प्लेसेंटा मिलने के बाद वनकर्मियों ने हथिनी के प्रसव होने का अनुमान लगाया और अधिकारियों को इसकी सूचना दी। इसके बाद वन विभाग के अधिकारियों के निर्देश पर हथिनी और उसके बच्चे की तलाश शुरू की गई। वनकर्मियों ने उनकी लोकेशन का पता लगाया, लेकिन तब तक हथिनी अपने बच्चे और झुंड के कुछ अन्य हाथियों के साथ मरवाही के जंगल की ओर आ चुकी थी। हथिनी शावक को जिले की सीमा पर स्थित सुखाड़ नाला पार कराकर मटियाडांड़ के जंगल में ले आई है। शावक की सुरक्षा में जुटा पूरा झुंड नवजात शावक की सुरक्षा को लेकर हाथियों का दल काफी सतर्क है। हाथी उसे चारों तरफ से घेरकर चलते हैं, ताकि कोई खतरा उसके पास न पहुंच सके। झुंड में दूसरे शावक भी मौजूद हैं। ऐसे में हाथियों के करीब जाना खतरनाक हो सकता है। अगर उन्हें अपने बच्चों पर खतरा महसूस हुआ, तो वे हमला भी कर सकते हैं। वन विभाग ने हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए इलाके में निगरानी बढ़ा दी है। जंगल के आसपास के गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों को सतर्क किया जा रहा है। लोगों से कहा गया है कि वे हाथियों के पास जाने या उन्हें परेशान करने की कोशिश न करें। हाथियों की मौजूदगी की जानकारी मिलने पर वन विभाग के निर्देशों का पालन करें। 27 किसानों की धान की फसल को नुकसान एक तरफ हाथियों के दल में नए शावक के आने से वन विभाग उसकी सुरक्षा पर नजर रख रहा है, वहीं दूसरी तरफ हाथियों के झुंड ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। हाथियों ने अलग-अलग समूहों में बंटकर 27 किसानों की धान की फसल को नुकसान पहुंचाया है। खेतों में कटाई के लिए तैयार हो रही धान की फसल को हाथियों ने खाकर और पैरों से रौंदकर बर्बाद कर दिया। मरवाही वन परिक्षेत्र के मटियाडांड़ बीट के भटियार, ललमट्टा और अखराडांड़ इलाके में हाथियों की आवाजाही बनी हुई है। यहां कक्ष क्रमांक 2000 और 2002 के आसपास हाथियों के अलग-अलग समूह घूम रहे हैं। इन इलाकों से लगे खेतों में धान की फसल को नुकसान पहुंच रहा है। वन विभाग की ओर से प्रभावित किसानों के मुआवजे के लिए प्रकरण तैयार किए जा रहे हैं। हालांकि, किसानों का कहना है कि सरकार की ओर से प्रति एकड़ करीब 9 हजार रुपए का मुआवजा दिया जाता है, जो फसल के नुकसान की तुलना में काफी कम है। इससे किसानों में मुआवजा नीति को लेकर नाराजगी है। जल्दी जंगल से जाने की संभावना कम जानकारों के मुताबिक, मरवाही के जंगल और आसपास के खेतों में हाथियों के खाने के लिए पर्याप्त मात्रा में हरे पत्ते और धान की फसल मौजूद है। यही वजह है कि हाथियों का दल जल्द ही इस इलाके से दूसरे स्थान पर चला जाएगा, इसकी संभावना कम है। वन विभाग हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है। विभाग का कहना है कि निगरानी का उद्देश्य हाथियों की सुरक्षा के साथ ग्रामीणों को सुरक्षित रखना भी है। जंगल के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर वन अमले के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।