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पठानकोट में सड़कों पर उतरे बैंक कर्मचारी:फाइव डे वर्किंग वीक को लेकर की हड़ताल; केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) के देशव्यापी आह्वान पर शुक्रवार को देशभर के बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने एक दिवसीय हड़ताल की। 5-डे वर्किंग वीक समेत अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर की गई इस हड़ताल के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में बैंकिंग सेवाएं और सामान्य कामकाज प्रभावित हुआ। पठानकोट के ढांगू रोड स्थित एसबीआई बैंक के सामने अलग-अलग बैंकों और युनियन से जुड़े यूनियन संगठनों के कर्मचारियों व अधिकारियों ने एकजुट होकर हड़ताल में हिस्सा लिया और अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार आवाज उठाई। यूनियन नेताओं ने दावा किया कि यह हड़ताल राष्ट्रव्यापी स्तर पर पूरी तरह सफल रही है। मार्च 2024 में हुआ था समझौता यूनियन पदाधिकारी संजय कुमार सहित अन्य नेताओं ने बताया कि 5-डे बैंकिंग लागू करने को लेकर मार्च 2024 में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और बैंक यूनियनों के बीच औपचारिक समझौता हुआ था। हालांकि, लंबा समय बीत जाने के बाद भी इसे लागू नहीं किया गया। नेताओं का आरोप है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बाद भी मांग पूरी न होने के कारण कर्मचारियों को हड़ताल पर जाने का कड़ा कदम उठाना पड़ा। अन्य विभागों की तर्ज पर मांग, डिजिटल सेवाएं जारी यूनियन प्रतिनिधियों ने तर्क दिया कि केंद्र सरकार के कार्यालयों में 1985 से ही पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू है। इसके अलावा कई राज्यों के सरकारी व जिला कार्यालयों, अदालतों, आयकर विभाग, शेयर बाजार, भारतीय रिजर्व बैंक और एलआईसी जैसे प्रमुख संस्थानों में भी 5 दिन का ही कार्य सप्ताह है। नेताओं ने यह भी रेखांकित किया कि आधुनिक समय में बैंक ग्राहक एटीएम, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई जैसे डिजिटल माध्यमों से 24 घंटे और सातों दिन बैंकिंग सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं। काम का समय 40 मिनट बढ़ाने पर दी थी सहमति मार्च 2024 में हुए समझौते के तहत यूनियनों ने यह स्पष्ट किया था कि शनिवार को अवकाश मिलने की स्थिति में ग्राहकों का कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए कर्मचारी हर कार्यदिवस (सोमवार से शुक्रवार) में बैंकिंग और काम के समय को 40 मिनट बढ़ाने के लिए तैयार हैं। वेतन कटने के बावजूद एकजुट रहे कर्मचारी हड़ताल के चलते कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। यूनियन नेताओं के अनुसार, हड़ताल में शामिल होने वाले प्रत्येक कर्मचारी और अधिकारी का एक दिन का वेतन काटा जाता है। इसके बावजूद बैंक कर्मचारियों ने एक दिन के वेतन का त्याग करते हुए अपनी सामूहिक मांगों के पक्ष में एकजुटता दिखाई।