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BRICS Summit 2026: यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस पहुंचे दिल्ली, साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति समेत पहुंचे कई देशों के लीडर

BRICS Summit 2026 : राजधानी दिल्ली 12 और 13 सितंबर को होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है. शुक्रवार दोपहर संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस नई दिल्ली पहुंचे. हवाई अड्डे पर केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने उनका औपचारिक स्वागत किया. गुटेरेस की मौजूदगी से इस बहुपक्षीय मंच पर वैश्विक सुधारों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की चर्चाओं को और मजबूती मिलेगी.
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति और कई देशों के विदेश मंत्री पहुंचे
सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए ब्रिक्स सदस्य देश दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और पार्टनर देश युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलूपो भी राष्ट्रीय राजधानी पहुंच चुके हैं. दोनों नेताओं का स्वागत केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने किया.
इसके अलावा उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेतकिन, नाइजीरिया की विदेश मंत्री बियांका ओडुमेगू-ओजुकवु और फिलीपींस की विदेश मामलों की सचिव मारिया थेरेसा पी लाजारो भी दिल्ली पहुंच गई हैं. एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) के अध्यक्ष जू जियायी भी सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आए हैं.
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का तीन दिवसीय दौरा
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी अपने उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ शुक्रवार सुबह दिल्ली पहुंचे. हवाई अड्डे पर विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने उनकी अगवानी की. पुतिन के साथ रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव भी मौजूद हैं. फरवरी 2022 में यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद रूस से बाहर पुतिन का यह पहला व्यक्तिगत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन दौरा है, जहां वे द्विपक्षीय बातचीत में भी हिस्सा लेंगे.
भारत की अध्यक्षता और ब्रिक्स का वैश्विक प्रभाव
भारत अपनी 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत इस 18वें शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जिसका मुख्य विषय ‘बिल्डिंग फॉर रेसिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी’ रखा गया है. वर्तमान में ब्रिक्स में 11 सदस्य देश ब्राजील, चीन, इजिप्ट, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं.
यह समूह दुनिया की लगभग 49.5 प्रतिशत आबादी, वैश्विक जीडीपी का 40 प्रतिशत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के 26 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है, जो ग्लोबल साउथ के हितों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है.