समाचार · मध्य प्रदेश
पन्ना में आदिवासियों के घरों की तरफ धसक रहा पहाड़:टाइगर रिजर्व से विस्थापित 12 जिंदगियां खतरे में, दूरी अब 7 फीट बची
पन्ना टाइगर रिजर्व से विस्थापित आदिवासी परिवारों पर इस समय खतरा मंडरा रहा है। ये परिवार ग्राम बड़गाड़ी की नई बस्ती में रहते हैं, जो बृजपुर उप-तहसील में है। लगातार बारिश के कारण बुधवार 16 सितंबर को रिहायशी इलाके से सटी पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा अचानक खिसक गया। पहाड़ की मिट्टी करीब 20 फीट आगे बढ़कर अब मकानों से सिर्फ 7 फीट की दूरी पर आ गया है। इससे किसी भी पल बड़ी अनहोनी की आशंका बन गई है। पहाड़ खिसकने से ढलान के नीचे बने दो मकान सीधे खतरे में आ गए हैं। इनमें विशाल गोंड़ (पिता रामदीन गोंड़) का परिवार और विधवा जलव गोंड़ (पति स्वर्गीय उत्तम गोंड़) का 8 सदस्यों वाला परिवार शामिल है। इन दोनों घरों में कुल 12 लोग रहते हैं। ये सभी डर के साए में रातें बिताने को मजबूर हैं। मलबे की गति को देखते हुए डर है कि अगली तेज बारिश में दलदल घरों की दीवारों को तोड़कर पूरे मकानों को बहा ले जाएगा। स्थानीय ग्रामीण मुन्नीलाल ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि पहले सामने का इलाका समतल था। लेकिन बारिश के बाद पहाड़ धीरे-धीरे खिसकने लगा है। उन्होंने बताया, 'कल रात यह थोड़ा कम था, लेकिन आज रात भर में पहाड़ काफी आगे बढ़ गया। पहाड़ रोज खिसककर घरों की तरफ आ रहा है।' मुन्नीलाल ने यह भी बताया कि पन्ना टाइगर रिजर्व से विस्थापित करते समय उनसे यहीं झाड़ साफ करके मकान बनाने को कहा गया था। उन्हें नहीं पता था कि आगे चलकर यह पहाड़ इस तरह खिसकेगा और 12 लोगों की जान खतरे में पड़ जाएगी। पुनर्वास में अनदेखी का आरोप
प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि टाइगर रिजर्व से हटाते समय पुनर्वास स्थल की भौगोलिक परिस्थितियों और सुरक्षा मानकों का सही आकलन नहीं किया गया। उन्हें पहाड़ के ठीक नीचे ढलान वाले खतरनाक इलाके में बसा दिया गया, जहां अब बारिश होते ही पहाड़ी की मिट्टी कटकर सीधे उनके आशियाने निगलने पहुंच जाती है। पीड़ितों की प्रशासन से प्रमुख मांगें है कि दोनों प्रभावित परिवारों को बिना देरी किए सुरक्षित स्थान, टीन शेड या वैकल्पिक सरकारी भवनों में शिफ्ट किया जाए।पहाड़ी से हो रहे मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए तुरंत रिटेनिंग वॉल (पक्की दीवार) व ड्रेनेज सिस्टम बनाया जाए। विस्थापित आदिवासियों के पुनर्वास स्थल की दोबारा समीक्षा कर उन्हें किसी सुरक्षित स्थान पर पट्टे दिए जाएं। समय रहते प्रशासनिक हस्तक्षेप न होने पर 12 मासूम जिंदगियों के साथ कभी भी बड़ा हादसा घटित हो सकता है।