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छात्र कॉलेज नहीं आते, फिर भी ऑनलाइन हाजिरी:शिक्षक बोले- हमारे पास ऑप्शन नहीं, छात्रवृत्ति दिलाने दर्ज करनी पड़ती उपस्थिति
शहडोल के केशवाही सरकारी कॉलेज में व्यवस्थाओं की जांच के दौरान कई अनियमितताएं सामने आई। छात्रों की हाजिरी रजिस्टर या तो खाली मिले, या कुछ महिनों के रिकॉर्ड ही नहीं मिले। दोपहर के समय कक्षाएं खाली मिलीं। कुछ कमरों में सिर्फ एक-दो छात्र बैठे थे, जबकि कुछ पूरी तरह खाली थे। कॉलेज परिसर में प्रोफेसर तो दिखे, लेकिन कक्षाओं में छात्रों की संख्या बहुत कम थी। छात्रों ने बताया कि कॉलेज में नियमित उपस्थिति कम ही रहती है। भास्कर टीम अनियमीतताओं की हकीकत जानने मौके पर पहुंची। पढ़िए यह रिपोर्ट… सवाल: जब कक्षाओं में छात्र नहीं हैं, तो ऑनलाइन रिकॉर्ड में उनकी हाजिरी कैसे दर्ज हो रही है? भास्कर टीम ने कॉलेज के हाजिरी रजिस्टर देखे तो पता लगा कि कुछ शिक्षकों के पास छात्रों की हाजिरी लगाने के लिए रजिस्टर ही नहीं थे। जिनके पास रजिस्टर थे, उनमें भी कई जगह रिकॉर्ड पूरा नहीं था। कहीं महीना नहीं लिखा था, तो कहीं सिर्फ छात्रों के नाम थे, लेकिन रोज की हाजिरी नहीं थी। कुछ रजिस्टरों में जुलाई के 10-15 दिनों तक हाजिरी लगी थी, उसके बाद के कॉलम खाली थे। हाजिरी रजिस्टर कॉलेज में छात्र की नियमितता का पहला रिकॉर्ड होता है। ऐसे में रजिस्टरों की यह हालत देखकर ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज हाजिरी पर सवाल उठने लगे। प्रोफेसर बोले- छात्रवृत्ति के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर हाजिरी डालना जरूरी भास्कर टीम ने कॉलेज में मौजूद असिस्टेंट प्रोफेसर और कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे सहायक शिक्षकों से पूछताछ की। उनसे पूछा गया कि जब बच्चे नियमित कॉलेज नहीं आते है, तो ऑनलाइन पोर्टल पर उनकी हाजिरी कैसे डाली जाती है? शिक्षकों ने जवाब दिया कि छात्र कॉलेज नहीं आते, लेकिन उन्हें छात्रवृत्ति मिलनी होती है। छात्रवृत्ति के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर हाजिरी डालना जरूरी है, इसलिए छात्रों की हाजिरी ऑनलाइन दर्ज करनी पड़ती है। कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आशीष तिवारी ने कहा- छात्र बोले- प्रोफेसर उपस्थिति दर्ज होने-परीक्षा में पास करने का भरोसा देते कॉलेज में मौजूद विद्यार्थियों से बात करने पर छात्रों ने बताया कि कॉलेज में नियमित रूप से आने वाले विद्यार्थियों की संख्या काफी कम रहती है। कुछ छात्रों ने यह भी कहा कि उन्हें प्रोफेसरों की ओर से उपस्थिति दर्ज होने और परीक्षा में पास कराने का भरोसा दिया जाता है। वहीं, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आशीष तिवारी ने यूनिवर्सिटी के रुल्स बताते हुए कहा- “हमसे एक बार भी डाटा नहीं मांगा जाता है की हम पढ़ाते हैं या नहीं। न कोई रजिस्टर मांगता है, न ये मैटर करता है। छात्र वायवा देने आए या न आए, उसे पासिंग मार्क्स देकर पास करना ही होता है। बच्चे कॉलेज नहीं भी आए, तो भी उन्हें छात्रवृत्ति मिलती ही है।” सवाल: सरकारी कॉलेज में पढ़ाई का वास्तविक रिकॉर्ड क्या है और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज उपस्थिति कितनी वास्तविक है? कई रजिस्टर देखने पर कई तरह की लापरवाही सामने आई। कहीं रजिस्टर ही नहीं था, कहीं महीना दर्ज नहीं था, तो कहीं बच्चों के नाम। कुछ जगह शुरुआती दिनों की हाजिरी दर्ज करने के बाद आगे की प्रविष्टियां नहीं मिलीं। यानी विद्यार्थियों की रोज की उपस्थिति का ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि कौन-सा विद्यार्थी कब कॉलेज आया और कितने दिन कक्षा में मौजूद रहा। लेकिन ऑनलाइन पोर्टल पर छात्रों की उपस्थिति नियमित रूप से दर्ज की जा रही है, तो उसका मिलान इन रजिस्टरों से किया जाना जरूरी है। इसी मिलान से साफ होगा कि ऑनलाइन रिकॉर्ड और वास्तविक उपस्थिति में कितना अंतर है। कॉलेज भवन में रिसाव, दीवारों में दरारें कक्षाओं और रजिस्टरों तक पड़ताल के बाद कॉलेज भवन का निरीक्षण किया गया। कई जगह पानी रिसने के निशान मिले। दीवारों पर दरारें भी नजर आईं। छात्रों और कॉलेज प्रबंधन ने परिसर की दूसरी समस्याएं भी बताईं। कॉलेज में बाउंड्री वॉल नहीं होने से परिसर खुला है। प्रबंधन का कहना है कि बाउंड्री नहीं होने के कारण कॉलेज की जमीन को लेकर भी परेशानी है। आसपास के लोगों द्वारा जमीन पर कब्जे करने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। खेल सामग्री की गुणवत्ता ऐसी की 1-2 शॉट में टूटा बैट कॉलेज में विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराई गई खेल सामग्री भी शिकायतों के घेरे में है। छात्रों ने बताया कि क्रिकेट खेलने के लिए मिला बैट एक-दो शॉट में ही टूट गया। दूसरी खेल सामग्री की गुणवत्ता को लेकर भी विद्यार्थियों ने सवाल उठाए। बुढ़ार में पदस्थ प्राचार्य को केशवाही कॉलेज का अतिरिक्त प्रभार केशवाही कॉलेज में स्थायी प्राचार्य की व्यवस्था भी नहीं है। बुढ़ार में पदस्थ प्राचार्य को यहां अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। केशवाही बुढ़ार से करीब 40 किलोमीटर दूर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने दूरस्थ क्षेत्र में संचालित कॉलेज के लिए नियमित प्रशासनिक निगरानी जरूरी है। छात्रों और स्थानीय लोगों के मुताबिक कॉलेज में नियमित उपस्थिति और पढ़ाई को लेकर भी निगरानी की जानी चाहिए। सिर्फ आर्ट्स की पढ़ाई, साइंस के लिए बाहर जाने को मजबूरी केशवाही कॉलेज में फिलहाल आर्ट्स संकाय की पढ़ाई होती है। साइंस सहित दूसरे संकाय उपलब्ध नहीं होने के कारण क्षेत्र के विद्यार्थियों को बुढ़ार या शहडोल जाना पड़ता है। यहां कॉलेज खोलने का उद्देश्य केशवाही और आसपास के गांवों के विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना था। ऐसे में स्थानीय लोगों की मांग है कि कॉलेज में नए संकाय शुरू किए जाएं और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। ताकी छात्रों को बाहर न जाना पड़े। केशवाही में कॉलेज की जरूरत का मुद्दा नया नहीं है। विधानसभा के पुराने रिकॉर्ड में भी क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए लगभग 30-40 किलोमीटर दूर जाने का जिक्र है। परीक्षा पास किए 1-2 साल बीते, फिर भी अंकसूची नहीं मिली कॉलेज से पढ़ाई पूरी कर चुके कुछ पूर्व विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें परीक्षा पास किए 1-2 साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक अंकसूची नहीं मिली। अंकसूची के अभाव में आगे की पढ़ाई और अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाओं में परेशानी हो रही है।