Saturday, 4 July 2026
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बिहार में मुखिया का चुनाव लड़ने से पहले पढ़ लें ये खबर, 10 साल बाद बदल सकता है आरक्षण रोस्टर, जानिए क्या है नियम

INT News4 July 2026 at 12:48 pm

Bihar Panchayat Chunav: बिहार में होने वाले पंचायत चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे अंतिम चरण में पहुंच रही हैं. हालांकि चुनाव की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन गांवों में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. इस बार सबसे ज्यादा चर्चा पंचायतों के आरक्षण रोस्टर को लेकर है. माना जा रहा है कि करीब 10 साल बाद कई पंचायतों में आरक्षण की श्रेणी बदल सकती है. इसका सीधा असर मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, वार्ड सदस्य और पंच के चुनाव पर पड़ेगा.

क्यों चर्चा में है आरक्षण रोस्टर?

पंचायत चुनाव में किस पंचायत की सीट सामान्य होगी और कौन-सी सीट अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अत्यंत पिछड़ा वर्ग या महिला के लिए आरक्षित होगी, इसका फैसला आरक्षण रोस्टर से होता है. यही वजह है कि इस बार हजारों संभावित उम्मीदवार अंतिम सूची का इंतजार कर रहे हैं.

10 साल बाद बदल सकता है आरक्षण चक्र

पंचायत राज नियमों के अनुसार पंचायतों में आरक्षण हमेशा एक जैसा नहीं रहता. यह रोटेशन सिस्टम के तहत तय होता है. पिछली बार वर्ष 2016 में आरक्षण रोस्टर लागू किया गया था. अब 2026 में नया चक्र पूरा होने के कारण कई पंचायतों में आरक्षण बदलने की संभावना है.

अगर ऐसा होता है तो कई सामान्य सीटें आरक्षित हो सकती हैं. वहीं, कुछ आरक्षित सीटें जनरल कैटेगरी में भी आ सकती हैं. इससे कई पुराने जनप्रतिनिधियों और नए उम्मीदवारों की चुनावी रणनीति पूरी तरह बदल सकती है.

किन पदों पर होगा चुनाव?

पंचायत चुनाव में इन प्रमुख पदों के लिए मतदान कराया जाएगा.

मुखिया

सरपंच

पंचायत समिति सदस्य

जिला परिषद सदस्य

वार्ड सदस्य

पंच

इन सभी पदों के लिए आरक्षण रोस्टर अलग-अलग पंचायतों के हिसाब से तय किया जाएगा.

2011 की जनगणना बनेगी आधार

सूत्रों के अनुसार इस बार भी पंचायतों का आरक्षण वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर तैयार किया जा रहा है. नई जनगणना के आंकड़े उपलब्ध नहीं होने के कारण फिलहाल पुराने आंकड़ों का ही इस्तेमाल किया जाएगा. जिला स्तर पर पंचायतवार डेटा पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है. इसके बाद नियमानुसार आरक्षण रोस्टर तैयार होगा और अंतिम सूची जारी की जाएगी.

उम्मीदवारों ने अभी से शुरू कर दिया जनसंपर्क

अंतिम सूची आने से पहले ही बिहार के लगभग सभी जिलों में संभावित उम्मीदवार एक्टिव हो गए हैं. गांव-गांव जाकर लोगों से मुलाकात की जा रही है. सामाजिक कार्यक्रमों में भागीदारी बढ़ गई है. स्थानीय बैठकों और पंचायत स्तर की गतिविधियों में भी संभावित उम्मीदवार लगातार नजर आ रहे हैं.

हालांकि अधिकांश दावेदार अभी खुलकर चुनाव लड़ने की घोषणा नहीं कर रहे हैं. उनका कहना है कि पहले आरक्षण सूची जारी हो जाए, उसके बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा.

मौजूदा जनप्रतिनिधियों की बढ़ी चिंता

आरक्षण में संभावित बदलाव ने वर्तमान मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्यों की चिंता भी बढ़ा दी है. कई जनप्रतिनिधियों को डर है कि उनकी सीट किसी दूसरे वर्ग के लिए आरक्षित हो सकती है. ऐसी स्थिति में उन्हें या तो नई रणनीति बनानी होगी या फिर किसी दूसरे क्षेत्र से चुनाव लड़ने पर विचार करना पड़ सकता है.

बदल सकते हैं चुनावी समीकरण

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि इस बार बड़े स्तर पर आरक्षण में बदलाव होता है तो कई पंचायतों में नए चेहरे सामने आएंगे. वहीं, कई पुराने नेताओं के लिए चुनाव पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकता है. इससे पूरे बिहार के पंचायत चुनाव का समीकरण बदल सकता है.

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अंतिम सूची के बाद और गर्म होगा माहौल

विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे ही पंचायतवार अंतिम आरक्षण सूची जारी होगी, चुनावी गतिविधियां और तेज हो जाएंगी. राजनीतिक दलों से जुड़े स्थानीय कार्यकर्ता भी अपने-अपने समर्थित उम्मीदवारों के पक्ष में रणनीति बनाना शुरू कर देंगे.

गांवों में जनसभाएं, बैठकें, प्रचार और चुनावी तैयारियां तेजी पकड़ लेंगी. फिलहाल सभी की नजर राज्य निर्वाचन आयोग और पंचायत राज विभाग की ओर से जारी होने वाली अंतिम आरक्षण सूची पर टिकी है. इसी सूची के बाद बिहार पंचायत चुनाव 2026 की तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी.

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