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NHAI ने दी हरी झंडी! पानीपत-गोरखपुर हाईवे कॉरिडोर से बदल जाएगी UP के 19 जिलों की तस्वीर

NHAI Highway Project: पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल तक सफर को आसान बनाने वाले एक बड़े हाईवे प्रोजेक्ट का रास्ता साफ हो गया है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने शामली-गोरखपुर हाई-स्पीड ग्रीनफील्ड हाईवे कॉरिडोर के अलाइनमेंट को मंजूरी दे दी है. पानीपत से शामली होते हुए गोरखपुर तक प्रस्तावित यह कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के 18 जिलों और उत्तराखंड के हरिद्वार से होकर गुजरेगा. हाईवे पर वाहनों की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक रखने की योजना है.
चार लेन का बनेगा हाई-स्पीड कॉरिडोर
शामली से गोरखपुर तक बनने वाला यह हाईवे प्रदेश के सबसे लंबे प्रवेश नियंत्रित नेशनल हाईवे कॉरिडोर में शामिल होगा. इसे फिलहाल चार लेन का बनाया जाएगा, जिसे भविष्य में छह लेन तक बढ़ाया जा सकेगा. NHAI लखनऊ के क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल के मुताबिक, प्रदेश के पूरब और पश्चिम को जोड़ने वाले इस कॉरिडोर के अलाइनमेंट को NHAI मुख्यालय से मंजूरी मिल चुकी है. निर्माण की विस्तृत कार्ययोजना भी स्वीकृति के लिए मुख्यालय भेज दी गई है. उम्मीद है कि इसे भी जल्द मंजूरी मिल जाएगी.
दो फेज में होगा हाईवे का निर्माण
यूपी में इस हाईवे का निर्माण दो चरणों में किया जाएगा. पहले चरण की लंबाई 348.039 किलोमीटर होगी, जबकि दूसरे चरण में 397.137 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर बनाया जाएगा.
पहले फेज में इन जिलों से गुजरेगा हाईवे
पहले फेज में कॉरिडोर शामली से शुरू होकर मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, हरिद्वार, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली और पीलीभीत होते हुए आगे बढ़ेगा. इस चरण में हाईवे पर 12 आरओबी और 18 अंडरपास बनाए जाएंगे. इसके अलावा 25 बड़े पुल और 125 छोटे पुल बनाए जाने की योजना है. यात्रियों की सुविधा के लिए आठ स्थानों पर जनसुविधा केंद्र भी विकसित किए जाएंगे.
दूसरे फेज में पूर्वांचल तक पहुंचेगा कॉरिडोर
दूसरे फेज में हाईवे लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, संतकबीर नगर और गोरखपुर होते हुए कुशीनगर तक पहुंचेगा. इस चरण में 8 आरओबी और 16 अंडरपास बनाए जाएंगे. इसके साथ ही 38 बड़े और 145 छोटे पुलों का निर्माण होगा. यात्रियों के लिए छह स्थानों पर जनसुविधा केंद्र विकसित किए जाएंगे.
कुशीनगर से आगे बिहार और सिलीगुड़ी तक प्रस्तावित विस्तार
क्षेत्रीय अधिकारी के मुताबिक, यह कॉरिडोर कुशीनगर के बाद बिहार होते हुए पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक ले जाने का प्रस्ताव है. ऐसे में भविष्य में यह हाईवे उत्तर प्रदेश को देश के पूर्वी हिस्से से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण सड़क मार्ग के रूप में विकसित हो सकता है.
100 किमी प्रति घंटे होगी रफ्तार
ग्रीनफील्ड हाईवे को हाई-स्पीड ट्रैफिक को ध्यान में रखकर विकसित किया जाएगा. इस पर वाहनों की अधिकतम निर्धारित रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे होगी. प्रवेश नियंत्रित व्यवस्था के चलते लंबे सफर में समय की बचत होने और पश्चिमी यूपी से पूर्वांचल तक कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद है.
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